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“जनतंत्र को पाल रहे हैं बड़े अख़बार”

प्रभात ख़बर, जमशेदपुर की तरफ़ से जवाब आया है। उनके मुख्य संवाददाता विनोद शरण ने यह जवाब भेजा है। उनका कहना है कि तथागत ने प्रभात ख़बर पर जो आरोप लगाए हैं वो सभी बेबुनियाद है। उनका अख़बार कोई भेदभाव नहीं कर रहा। बल्कि सभी उम्मीदवारों को एक समान जगह दी जा रही है। सभी को जिताया जा रहा है। अगर किसी दिन सरयू राय की जीत सुनिश्चित की जाती है तो अगले दिन उनके विरोधियों के बारे में भी वैसी ही सकारात्मक ख़बरें छापी जाती हैं। अपने ख़त में विनोद शरण ने तथागत के साथ जनतंत्र पर भी कई आरोप लगाए हैं। आप उन सभी आरोपों पर एक नज़र डालिए। – मॉडरेटर

सच सुनिये-देखिये प्रभात ख़बर पर आरोप लगानेवाले

प्रिय समरेंद्र जी

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प्रभात ख़बर की आचार संहिता पर सरयू राय भारी शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट पढी। तथागत नाम से यह रिपोर्ट लिखी गयी है। इसमें सरयू राय से संबंधित दो ख़बरों की कटिंग भी है और उस पर चर्चा है। अब मेरी बात सुनिये। सरयू राय से संबंधित वह रिपोर्ट मैंने ही लिखी है। मैं पिछले 20 साल से प्रभात ख़बर में हूं। आपने लिखा है कि ख़बर देखने से पता चलता है कि रिपोर्टर रिश्वत लेकर लिख रहा है। यह आरोप मेरे ऊपर आपने लगाया है। गंभीर आरोप है। किसी तथागत ने आपको प्रभात ख़बर में छपी दो-चार रिपोर्ट की कटिंग भेज दी और आपने लिख दिया कि अख़बार सरयू राय का है। क्या आपने चुनाव के दौरान पूरे प्रभात ख़बर अख़बार को देखा है। अन्य प्रत्याशियों की ख़बरें कैसे, कितनी छप रही है, यह देखा है? मैं आपकी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देना नहीं चाहता था। लेकिन चूंकि व्यक्तिगत टिप्पणी की गई है, मुझे करप्ट बताने का प्रयास किया है, इसलिए जवाब भी पढिये।

सरयू राय जमशेदपुर पश्चिमी से भाजपा के प्रत्याशी हैं। इसी क्षेत्र से कांग्रेस ने बन्ना गुप्ता को और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मोहन कर्मकार को मैदान में उतारा है यानी ये दोनों सरयू राय के खिलफ चुनाव लड़ रहे हैं। प्रभात ख़बर उसी प्रमुखता से बन्ना गुप्ता और मोहन कर्मकार की भी ख़बरें छाप रहा है, जिस प्रमुखता से सरयू राय की ख़बरें छपी हैं। तो क्या प्रभात ख़बर बन्ना गुप्ता या मोहन कर्मकार का हो गया? ये दोनों ही नहीं, निर्दलीय प्रत्याशियों को भी प्रभात ख़बर प्रमुखता से जगह दे रहा है। इसलिए प्रभात ख़बर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना मानसिक दिवालियापन ही है। आपको हम हाल में प्रभात ख़बर में छपी रिपोर्ट से संबंधित कटिंग भी भेज रहे हैं। अगर आपमें जरा सी भी नैतिकता होगी, तो इसे पढेंगे, विचार करेंगे। इसी प्रभात ख़बर में चुनाव के दौरान सरयू राय के ख़िलाफ़ कई रिपोर्ट छपी है।

उदाहरण – सरयू ने धरातल पर कोई काम नहीं किया : बन्ना गुप्ता (18 नवंबर, पेज चार)। बस्तियों के विकास के लिए सरयू राय ने कुछ नहीं किया (15 नवंबर, पेज चार)। पांच वर्ष में सरयू राय की संपत्ति दोगुनी हुई (6 नवंबर, पेज चार)। सरयू, बन्ना समेत चार प्रत्याशियों को शो कॉज (17 नवंबर पेज दो)। बिष्टुपुर : झंडा लगाने पर सरयू-बन्ना पर केस (17 नवंबर पेज तीन)। ये तो चंद उदाहरण हैं (सभी की कटिंग भेज रहा हूं)।

अब देखिये सरयू राय के ख़िलाफ़ जो मुख्य प्रत्याशी बन्ना गुप्ता (कांग्रेस) और मोहन कर्मकार (जेएमएम) हैं, उनके समर्थन में छपी ख़बरें। भाई और बेटा बन कर रहूंगा: बन्ना (16 नवंबर पेज पांच)। माता-पिता का आशीर्वाद लेकर घर से निकले बन्ना (8 नवंबर पेज 11)। गरीब-गुरबों के लिए लड़ता रहूंगा : बन्ना (15 नवंबर पेज तीन)। युवा आगे आयें, तभी देश का भला : मोहन (17 नवंबर पेज तीन)। मोहन को मिल रहा जीत का आशीर्वाद (16 नवंबर पेज पांच)। ये सिर्फ़ मोहन कर्मकार और बन्ना गुप्ता से संबंधित छपी ख़बरों के कुछ उदाहरण हैं। आगे और देखिये। प्रभात ख़बर ने दो नवंबर को सरयू राय और मोहन कर्मकार और 10 नवंबर को मोहन कर्मकार और बन्ना गुप्ता का हाथ मिलाते व गला मिलते हुए तसवीर छापी, ताकि समाज में यह मैसेज जाये कि यहां के प्रत्याशियों के बीच कैसी स्वस्थ स्पर्धा है। प्रभात ख़बर का यह प्रयास क्या सराहनीय नहीं है?

आपने जिन ख़बरों की कटिंग प्रकाशित की है, उसमें एक है -मुसलमान भाजपा से हाथ मिलायें। उसके ऊपर के स्लग को पढिये। यह बयान है भाजपा नेता शाहनवाज का। इसे प्रभात ख़बर ने 17 नवंबर को पेज एक पर छापा था। इसलिए कि शाहनवाज राष्ट्रीय नेता हैं। दूसरे दिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सचिन पायलट जमशेदपुर आये। उन्हें भी प्रभात ख़बर के पेज एक पर तस्वीर समेत उतनी ही जगह दी गयी जितनी जगह शाहनवाज हुसैन को दी गयी थी। यह है प्रभात ख़बर की निष्पक्षता का उदाहरण।

आपने सरयू राय से संबंधित छपी एक रिपोर्ट में कुछ पंक्तियों का उल्लेख किया है। इसमें सरयू राय के बारे में लिखा गया है कि जहां-जहां वे जा रहे हैं, वहां उन्हें बेहतर समर्थन मिल रहा है। इसी से आपको लगता है कि प्रभात ख़बर सरयू राय के समर्थन में खड़ा है और रिपोर्टर ने पैसा लेकर यह रिपोर्ट लिखी है। जरा आंख खोलिये और पढिये सरयू राय के विरोधी प्रत्याशी बन्ना गुप्ता के बारे में प्रभात ख़बर के 17 नवंबर के पेज तीन पर छपी रिपोर्ट : मां-पिता का आशीर्वाद ले निकलते हैं बन्ना गुप्ता। इसमें रिपोर्टर ने पहले पैरा में ही लिखा है – स्थिति यह है कि मानगो, कदमा, सोनारी में उन्हें जोरदार जनसमर्थन मिल रहा है। उनके लिए लहर चल रही है, जो चुनाव में परिणाम देनेवाली है। यह रिपोर्ट सरयू राय के लिए नहीं, बल्कि उनके विरोधी बन्ना गुप्ता के लिए लिखी गयी है। यह रिपोर्ट आपको क्यों नहीं दिखाई देती? इस रिपोर्ट को देखने के बाद आप तो यही कहेंगे कि प्रभात ख़बर बन्ना गुप्ता के लिए काम कर रहा है। कितना-कितना उदाहरण आपको गिनायें।

दरअसल आप प्रभात ख़बर के घोर विरोधी हैं जो और किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। प्रभात ख़बर ने अपनी निष्पक्षता के अनेक उदाहरण आपको दिये लेकिन क्या आपको यह नजर नहीं आता कि इस चुनाव में अन्य बड़े अख़बार क्या कर रहे हैं? कई प्रत्याशियों की ख़बरें दूसरे बड़े अख़बारों में इसलिए नहीं छप रही हैं क्योंकि वे विज्ञापन नहीं दे रहे हैं, जबकि प्रभात ख़बर में हर प्रत्याशी की ख़बर छप रही है, चाहे वह विज्ञापन देता है या नहीं देता है। रोज का अख़बार देखते रहिये। क्या कारण है कि आपकी नज़र अन्य बड़े अख़बारों की करतूतों की ओर नहीं जाती। मैं नहीं कह सकता कि वह कौन सी मजबूरी है, जिसके इशारे पर आप प्रभात ख़बर जैसे छोटे अख़बार को निशाना बना रहे हैं लेकिन बड़े अख़बारों की ओर आपका ध्यान नहीं जा रहा है। चुनाव में ये अख़बार क्या कर रहे हैं? कैसे पिछले और इस चुनाव में मामूली प्रत्याशियों को परेशान कर दिया है? लेकिन आप नहीं लिख सकते हैं। आपकी लाचारी पर तरस आता है। हो सकता है कि बड़े अख़बारों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं छाप कर आप अपना भविष्य सुरक्षित करने के प्रयास में हों। आप बड़े अख़बारों के ख़िलाफ़ लिख भी नहीं सकते क्योंकि वे बड़े पूंजीवाले हैं, आप जैसे लोगों को पाल कर रख सकते हैं।

जहां तक तथागत का सवाल है, अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है तो सामने आये और एक आरोप को साबित करें। चोर जैसा चुपके-चुपके वार न करे। झूठ छाप-छाप कर आप क्या बताना चाहते हैं?

आपने प्रभात ख़बर के झारखंड के वरिष्ठ संपादक अनुज कुमार सिन्हा को संघी बताया है। तरस आती है आपकी जानकारी पर। आप उन्हें संघी कहते हैं लेकिन सच यह है कि आरएसएस से उनका दूर-दूर का संबंध नहीं है। पिछले 25 साल में शायद आरएसएस के पक्ष में उनकी एक भी रिपोर्ट नहीं छपी है। समझ लीजिए, अनुज सिन्हा झारखंडी विचारधारा वाले पत्रकार हैं, जिनकी अधिकांश रिपोर्ट झारखंड आंदोलनकारियों-शहीदों और आदिवासियों से संबंधित रहती है, आरएसएस पर नहीं।

आपको सलाह है। जो अख़बार बेहतर काम कर रहे हैं, उन्हें काम करने दीजिए। हमारा अनुभव बताता है कि जब भी प्रभात ख़बर जैसे कोई छोटे अख़बार ने बेहतर पत्रकारिता की है, बडे अखबारों को यह पसंद नहीं आयी है। उनके इशारे पर कुछ लोग प्रभात ख़बर व उसके पत्रकारों के ख़िलाफ़ अभियान चलाते हैं, आप और तथागत उसी में से हैं। मैंने भी 20 साल में बहुत उतार-चढाव देखें हैं और कई तथागतों का हाल भी देखा है। ऐसे लोग न घर के होते हैं न घाट के। चूंकि आपने मेरे ऊपर आरोप लगाये, इसलिए मैं सबूत समेत आपको जवाब भेज रहा हूं। अगर आपमें नैतिकता बची है, अगर आपसे सच में भूल हो गयी है, तो इसे सुधारने का आप प्रयास करेंगे।

संलंग्न है प्रभात ख़बर में छपी रिपोर्ट की कटिंग।

विनोद शरण
मुख्य संवाददाता
प्रभात ख़बर
जमशेदपुर

वो दोनों रिपोर्ट जिनके जवाब विनोद शरण ने यह ख़त भेजा है।

प्रभात ख़बर में आचार संहिता का अंतिम संस्कार

“प्रभात ख़बर सरयू राय का मुखपत्र है”

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5 Responses to “जनतंत्र को पाल रहे हैं बड़े अख़बार”

  1. सुधीर शर्मा Reply

    November 22, 2009 at 4:39 pm

    चलिए यह अच्छा है। सबको जिता रहे हैं। वरना तथागत की रिपोर्ट से तो यही लग रहा था कि सिर्फ सरयू राय को ही जिता रहे हैं। आप सबको प्रभात ख़बर से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। रिपोर्ट कैसे बैलेंस की जाती है और बैलेंस करने के नाम पर पाठकों को कैसे भ्रमित किया जाता है।

  2. amit tyagi Reply

    November 22, 2009 at 5:21 pm

    yah prabhat khabar ki jimmedari aur nishpakshata par sawal uthane walon ke liye jordaaar tamacha hai. aarop lagane wale iska jawab jaroor dein, varna yahi samjha jayega ki we anargal kuchh bhee likhte rahte hain!

  3. vinay kumar Reply

    November 22, 2009 at 5:52 pm

    vinod sharan jee bahut badhiya jawab diya. jantantra wale prabhat khabar or nai duniya ke peeche yun hi pade hue hain. hariwansh jee or alok kumar jaise logon ko ye log patrakarita sikhana chah rahe hain jinhe khud patrakarita ka a b c nahin pata hai. kisi ke kahe ko youn hi sansani bana dena inki adat hai. aise logon ki baton ko ignore karna chahiye ya phir sabak sikhane ke liye court ki sahara lena chahiya. vinay kumar Delhi

  4. ek patrakar Reply

    November 22, 2009 at 7:42 pm

    prabhat khabar par bahas Kuch sankeern , Kuch niji bhi hoti maloom pad rahi hai. Yah element pichhli kai bahson mein bhi tha. Ye kahtra to rahta hi hai ki Kuch log aise gambheer platform par vichar ke saath saath niji hisaab bhi chukta kar lena chahte hain.par issues Nikal kar aaye hain. Pahla mudda harivansh ji. Main unhen door se ek jujharoo patrakar ke roop mein jaanta hoon. Main nahi jaanta ki 10 baras pahle ke aur aaj ke harivansh ji mein kya parivartan aaya hai kyonki globalisation aur market ki aandhi ne imaandari ke itne chogon ko ukhad feka hai ki kisi ki imaandari ki kasam khane ka saahas raha nahi.par harivansh ji ko taulna hai to ye dekhna padega ki unka paksh kidhar hai aur ek prekshak ke roop mein jab main dekhta hoon bastar ke aadivasiyon ke paksh mein Woh khade hain to mujhe lagta hai ki is patrakar ko jantantra ki chinta hai. doosri baat unke akhbaar ki . Mujhe lagta hai ki bada sawal yah hai ki usha martin jantantra ka jhanda le kar nahi chal raha hoga . Poonji hai to munafa maangegi. is maang ko prabhat khabar kaise poora kar raha hai ye harivansh ji behtar batayenge lekin main jaanta hoon ki desh ke teenon naye rajyon mein patrakarita ka patan hua hai aur ye patan to tathakathit main stream journalism ko poore desh mein hua hai. Log batate hain ki chhattisgarh mein Raman singh ne media ko mutthi mein kar rakha hai .bade bade media maalik Raman singh ke ghutno par hote hain . ek Bahut naami girami patrakar ka ek khabar ke baad Raman singh ko likha maafinaama delhi ke media galiyare mein ghoom raha hai. Ye hai badi poonji aur bade media maalikon ke interest ka dabav, jise patrakarita se kya lena dena ? media jis badi poonji ke shikanje mein hai Woh ise aur patan ki or dhakelegi . Aap saare media houses aur in par kabje ko lalayit doosre industrial houses ko dekh lijiye . Ye media industry mein invest karna chahte hain apne doosre projects ko sanrakshan dilane ke liye. naitiktaon ke paimane badal gaye hain . 30 saal pahle jin raston se media mein poonji ka pravesh media ke ek hisse ko achhot lagta tha aaj wahi use poore justification ke saath sweekar karne ko atur hai… Aap jo kar rahe hain Woh vidhava vilaap hai kyonki Aapke sapnon ki patrakarita moolya kho kar vidhava ho chuki hai .aur hakikat to ye hai ki jin moolyon ka aap sapna dekhte hain woh hamesha fantasy mein zyada the. Mujhe alok shrivastav ka likha yaad aata hai ki aazadi ke baad ka sabse bada ghotala is desh mein agar koi hai to Woh media ghotala hi hai. Ye ghotala aaj bhi koi kar raha hai to Woh maalik hi hai. Aap luknow se delhi ,bhopal Raipur ya kisi bhi bade shahar mein maalikon ko mili sarkari zaminon ki files khulwa len aur jaanch karwa len. Lekin jis din bhi ye hua takatvar media maalik use jantantra par hamla thahra dega. Harivansh ji jaise patrakar bechain hote honge lekin unke jimme poora prabandhan bhi hoga. aaj ke maalikon ne badi kushalta ke saath yah kaam kar daala hai. Darasal ek Bahut bhayanak gathjod satta aur media maalikon ke beech ban gaya hai . Aap apne aaspas dekh lijiye…jo is gathjod ko janta hai Woh patrakar nahi maalik banana chahta hai.
    Is tasveer ko badalna hoga . Ye is desh ki garib aabadi ke khilaf hai …khaastaur par us aabadi ke jo khanij sansaadhanon wale ilakon mein rahti hai . Aane wale dinon mein badi poonji ki patrakarita sarkar aur udyogpatiyon ke saath in gaeebon ko kuchalne ke liye niklegi. Ye kaam poori besharmi se shuru bhi ho gaya hai. Chhattisgarh aur jharkhand mein ye khula hone laga hai. Jansunwaiyon ke prahasan aur inka coverage agar koi dekhe to shayad ro pade. bada dalal maalik hai . Chot Uski poonji par kariye…benakab unke apavitra hilton ko kariye..aur tab harivansh ji se poochiye partner tum kidhar ho ?

  5. BABA Reply

    November 23, 2009 at 1:53 am

    Prabhat khabar ki yahi asli takat hai.isi ke bal par wah number one bana hua hai. par he jantantra wale bhai paisa lekar kisi sansthan ko badnam na kare. aapko asaliyat dekhni hai to prabhat khabar aaye. aapke sare bhram door ho jayenge.

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