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जागरण नंबर वन, भास्कर कमजोर, हिंदुस्तान मजबूत

दैनिक जागरण और टाइम्स ऑफ इंडिया की बादशाहत बरकरार है। दैनिक जागरण ने इस साल राउंड वन की तुलना में हल्की बढ़त हासिल की है। लेकिन उसके लिए बुरी ख़बर पिछले साल की तुलना में उसके पाठकों की संख्या में करीब दस लाख की कमी आई है। जबकि सबसे अधिक बढ़त हासिल की है दैनिक हिंदुस्तान ने।

आईआरएस 2009 राउंड टू के नतीजों के मुताबिक दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या 547.9 लाख रही है। हालांकि यह संख्या इसी साल राउंड वन (545.8 लाख) की तुलना में थोड़ी अधिक है, लेकिन 2008 राउंड टू की तुलना में काफी कम। तब पाठकों की संख्या 557.4 लाख थी। इसका मतलब यह निकला की दैनिक जागरण के करीब दस लाख पाठक कम हुए हैं।

हिंदी में दूसरे नंबर है दैनिक भास्कर। उसके पाठकों की संख्या भी घटी है। पिछले साल के 338.3 लाख पाठकों की तुलना में इस साल राउंड टू में उसकी रीडरशिप 329.6 लाख रही है। यानी दैनिक भास्कर की रीडरशिप भी दस लाख के करीब कम हुई है। यही नहीं इसी साल राउंड वन (335.5 लाख) की तुलना में भी भास्कर की रीडरशिप कम हुई है।
तीसरे नंबर पर है अमर उजाला। पारिवारिक विवादों से जूझ रहे इस अख़बार के पाठकों की संख्या 290.7 लाख है। जबकि पिछले साल यह 293.8 लाख थी। और उसी साल राउंड वन में यह 286.7 लाख थी। इस लिहाज से पिछले साल की तुलना में अमर उजाला को नुकसान है लेकिन इसी साल राउंड वन की तुलना में हल्का फायदा।

गला काट प्रतियोगिता में फायदे में रहा है हिंदुस्तान। हिंदुस्तान ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए रीडरशिप में करीब 13 की बढ़ोतरी की है। 2008 राउंड टू में उसकी रीडरशिप 266.3 लाख थी। जबकि इस साल राउंड वन में यह बढ़ कर 267.7 लाख हुई और अब यह 279.4 लाख हो गई है। यानी आक्रामक प्रचार का फायदा हिंदुस्तान को सबसे अधिक पहुंचा है।

हिंदी के टॉप टेन में हिंदुस्तान के अलावा जिस अख़बार की रीडरशिप बढ़ी है – वह है नवभारत टाइम्स। नवभारत टाइम्स के पाठकों की संख्या 51.8 लाख से बढ़ कर 53.7 लाख हो गई है।

हिंदी में जहां नंबर वन अख़बार की जड़ें कमजोर हुई हैं वहीं अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया ने नंबर दो अख़बार से अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों की संख्या 135.3 लाख दर्ज की गई है जबकि पिछले साल यह 133.4 लाख थी। यानी दो लाख की बढ़त।

जबकि दूसरे नंबर पर मौजूद अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के पाठकों की संख्या में इतनी ही गिरावट दर्ज की गई है। उसकी रीडरशिप 63.5 लाख से घट कर 61.4 लाख हो गई है।
तीसरे नंबर पर मौजूद है द हिंदू। उसकी रीडरशिप 52.3 लाख दर्ज की गई है जो कि पिछले साल के नतीजों की तुलना में थोड़ा कम है। पिछले साल यह आंकड़ा 52.8 लाख था।

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4 Responses to जागरण नंबर वन, भास्कर कमजोर, हिंदुस्तान मजबूत

  1. कुमार राकेश Reply

    November 23, 2009 at 3:01 pm

    हिंदुस्तान की बढ़त तो लाजवाब है। क्या कोई बता सकता है इस बढ़त का क्या राज है?

  2. ashish Reply

    November 23, 2009 at 4:57 pm

    Yes Hindustan is growing because of new editions. While in the largest single city market, i.e. Delhi they are far behind NBT. Please note that NBT is only in two cities

  3. Ashish Pandey Reply

    November 23, 2009 at 6:36 pm

    And the good news is that NBT is ahead of TOI and HT in Delhi… Hindi newspaper has beaten these two big english daily in capital…

  4. विवेक Reply

    November 24, 2009 at 11:05 am

    अगर एनबीटी के सिर्फ दो संस्करण हैं तो यह दिक्कत एनबीटी की है। उससे हिंदुस्तान का क्या लेना देना। यह तो टाइम्स समूह के मालिकों को फैसला करना होगा कि वो हिंदी अख़बार और ब्रांड को विकसित करना चाहते हैं या नहीं। अभी तक तो उनका रवैया उसे सिकोड़े रखने का ही है।

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