शिव सैनिक जब आईबीएन 7 और आईबीएन लोकमत के विक्रोली ऑफिस में तोड़-फोड़ कर रहे थे तो बस एक ही बात चिल्ला चिल्ला कर बोल रहे थे – बालासाहेब के खिलाफ कुछ कहा तो बर्दाश्त नहीं करेंगे। पिछले चार दशकों से बालासाहेब और उनके गुंडों की फौज मुंबई की जनता से जब तब कुछ ऐसे आती रही है। कभी मराठी संस्कृति के नाम, कभी मराठी-गैर मराठी विवाद खड़ा करके शिवसेना के गुंडों ने मुंबई को रैन्सम पर रखा हुया है। मासूम लोगों के साथ मारपीट करते हैं। मीडिया ऑफिस में तोड़फोड़ करके अपनी नपुंसकता का नंगा नाच दिखाते है। संस्कृति की रक्षा का ख्याल इतना कि आबीएन की महिला कर्मचारियों के साथ भी बदसलूकी की। अपनी भड़ास निकालने का ये गुर वो बरसों से अपने अराध्य देव बालासाहेब ठाकरे से सीखते आये हैं। इसलिये उनके अराध्य देव पर किसी ने अंगुली भी उठायी, मुखालफत की, लिखा या कहा तो वो उसे वो दंडित जरूर करते हैं। हमले के बाद अराध्यव देव के परम भक्त संजय राउत ने किसी आतंकी संगठन के तर्ज पर टीवी चैनलों पर आईबीएन पर हमले की जिम्मेदारी भी ली। उनके अराध्य देव जरूर खुश हुए होंगे।
क्योंकि इन दिनों उनके अराध्य देव दुखी हैं, चिन्ता में हैं। हाल के विधानसभा चुनावों में उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है। मराठी जनता ने उन्हे दुतकार दिया। वही मराठी जनता जिसके दम पर शिवसेना ने साढ़े चार साल मुंबई में हुकूमत संभाली। लेकिन सत्ता से बाहर रहे तो दस साल हो गये थे। सरकार बना कर गुंडागर्दी करने का अपना ही आनंद हैं। सत्ता के लिये छटपटा रहे थे। लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने, मराठी मानुष ने बालासाहेब के सपने को चकनाचूर कर दिया। उन्हें चारों खाने चित्त कर दिया। उम्र की इस ढलान पर उन्हें ‘धोखा’ दिया। उनके बेटे को गद्दी मिलने से पहले ही छीन ली। अब बालासाहेब और उनके गुंड़े इसकी भड़ास कहां निकालें। ‘धोखेबाज़’ मराठी मानुष पर ही तो। मुंबई की जनता पर ही तो। किसी अपहरणकर्ता की तरह मुंबई के लोगों से बीच-बीच में मुखातिब होकर ये गुंड़े अपनी अदालत लगा रहे। उन्हें लगता है हर वो वोटर जिसने शिवसेना को जीतने नहीं दिया वो सज़ा का हक़दार है। और मीडिया समेत वो लोग भी जो मुंबई में गुंडाराज के ख़िलाफ़ लामबंद रहे।
बालासाहेब अपनी ये भड़ास अपने भतीजे राज या उसके समर्थकों पर तो नहीं उतार सकते। क्योंकि चचा की तरह उसने भी गुंडों की फौज खड़ी कर रखी है जो उसके एक इशारे पर मुंबई में प्रलय ला सकती है। हर बात पर मराठी संस्कृति की दुहाई देते हुए हिंसक हो जाते हैं। मुंबई के फर्स्ट सिटिजन वही हैं। मराठी आन-बान के लिये उनके गुंडे किसी गैर-मराठी को सरेआम पीट सकते हैं। दंड दे सकते हैं। राज भी तो अराध्य देव बनने के रास्ते में हैं।
अब बालासाहेब का ये लाडला चश्मे को नाक पर ऊंचा चढ़ा कर चचा से पूछ रहा – मोठा गुंडा कोण आहे..! बड़ा गुंडा कौन..! पिछले सालों में शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पहले गुंडागर्दी की कंक्रीट तैयार की। उसमें उपद्रव, तोड़-फोड़ और हिंसा का गारा घोल कर मुंबई के नवनिर्माण का आधार रखने की पुरज़ोर कोशिश की। लोगों को पीटा, बाजारो को लूटा, मुंबई को बांटा, धमकाया, खूब सुर्खियां बटोरी। तब मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख ने राज के सर पर हाथ रख दिया। क्योंकि विरोधी वोट बांट के अपनी गद्दी बचाये रखनी थी। लेकिन फिर 26\11 के आतंकी हमले के बाद कांग्रेस हाई कमान ने उन्हें रुख़्सत कर दिया।
लेकिन तब तक तो तीर कमान से निकल चुका था। मुंबई में प्रलय आ चुकी थी। चचा हारे। भतीजा जीता। अब शिवसेना को दुख इस बात का है कि उनकी इमेज का कॉपीराइट राज ने कैसे चुरा लिया। भतीजे ने तो आंख से सुरमा ही चुरा लिया। बचा क्या? पानी तो पहले ही सूख चुका था। कहां चूक हुई कि जनता ने नकार दिया? अब शिवसेना के गुंडे बिलबिलाये घूम रहे। हार का गुस्सा मीडिया पर निकाल रहे। शिवसेना के अराध्य देव ने ये तय पाया है कि तालिबानियों की तर्ज पर गुंडागर्दी के उसी मकाम को फिर से हासिल करेंगे जो किसी जमाने में शिवसेना की पहचान हुआ करती थी।
मुंबई में काफी सालों से अंडरवर्ल्ड की खबरें आनी बंद हो गयी हैं। शायद पुलिस और पिछली सरकारों ने अंडरवर्ल्ड का खात्मा करने का जो बीड़ा उठाया था उसमें वो सफल रहे। अब अंडरवर्ल्ड नहीं। सब कुछ सामने है। प्रत्यक्ष है। अप्रत्यक्ष कुछ भी नहीं। पुलिस को भी दिख रहा। सरकार को भी। शेर की खाल में गीदड़ जब आदमखोर हो जाये तो उसके साथ क्या सुलूक करना चाहिये? ये सवाल एक बार ज़रा मुंबई और देश की जनता के बीच उछाल देना चाहिए। सरकार को जवाब मिल जायेगा। ((हरिभूमि से साभार))
((वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू IBN 7 में एडिटर (स्पेशल असाइनमेंट) हैं))
abhayveer singh
November 23, 2009 at 11:08 am
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Yahi nahin agale hi din Shiv sena ka dusra neta jiska naam Mumbai ke bahar bhi koi nahin janta voh bhi SACHIN ko bhala bura keha gaya vaah re HINDUSTAAN Aisa hamare Desh mein hi hota hai ki hum apne hi Dharohar aur sampatti haan SACHIN TENDULKAR BHARAT DESH KI SAMPATTI HI TO HAI, aur ye Shivsena Marathi ke naam pe apne ek maharashtrian PRIDE ki aalochna kar rahe hain ………….In logo ke baare mein to likhne ka matlab to apna waqt aur deemag kharaab karne jaisa hi hai………………….Vaise Maharashtra ke Marathiyon jinke ye numainde banate hain unhi marathiyon ne inko inki aukat Assembly Election mein de di hai voh to theek hai haal filhaal voh election nahin hai varna inko to ek seat bhi nahin milti ,
ALOK JI dekh lijiyega kuch hi mahino mein BMC ke election hone hain Marathi Manush inko apna Jawaab de degi, Haan ek baat Humko in faltu ke aadmiyon ke chakkar mein akar apas mein nahin ladna chahiye arre jo nokari pesha wala hai voh apne job parivaar Desh aur deshwasiyo se pyaar karta hai haan kabhi kabhio kuch man mutav ho sakta hai inki pagalpan wali baat sunke parantu shaam ko voh apne ghar apne biwi bachcho ke beech apne ghar jana vahta hai naa ki jail, Ye to jauil jakar bhi khus hote hain ki publicity mili inki baat pe dhyaan dene k alava humko bahut jyada important kaam hain……………..Abhayveer
सुधीर शर्मा
November 23, 2009 at 2:55 pm
बहुत बढ़िया लेख है। सच में इन दोनों चचा-भतीजा ने पूरे महाराष्ट्र को बंधक बना रखा है। कांग्रेस और एनसीपी की सरकार इनके आगे कुत्ते की तरह है। ये दोनों जब भड़कते हैं तो सरकार कुत्ते की तरह दुम हिलाने लगती है। गजब हाल है। लगता ही नहीं कि कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज है।