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4 साल पूरे होने पर नीतीश सरकार ने अख़बारों पर लुटाया खजाना

बिहार में एनडीए सरकार ने चार साल पूरे कर लिए हैं। नीतीश कुमार की अगुवाई में चल रही सरकार अब चार साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। इस जश्न में सरकारी खजाना पानी की तरह बहाया जा रहा है। बड़े-बड़े विज्ञापन छापे और छपवाए जा रहे हैं। इस जश्न का सबसे अधिक फायदा मीडिया कंपनियों को हुआ है। अख़बारों की तो चांदी ही चांदी है। कहीं आठ, कहीं नौ तो कहीं दस पन्नों का विज्ञापन छपा है। नीतीश सरकार के मुताबिक बीते चार साल में उसने बिहार की सूरत बदल दी है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल-कूद… सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व क्रांति हुई है। अपराध का खात्मा हो गया है। निवेश बढ़ा है। रोजगार के नए-नए अवसर खुले हैं। और तमाम उपलब्धियों के लिए विज्ञापन छपवाए गए हैं। हर ख़बार में विज्ञापन की भाषा अलग-अलग है। कहीं-कहीं मुद्दे भी अलग-अलग हैं। लेकिन लक्ष्य सिर्फ़ एक। नीतीश कुमार और एनडीए का गुणगान करना।

इस गुणगान में राज्य सरकार के कितने करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जनता की गाढ़ी कमाई का कितना हिस्सा अख़बार मालिकों की जेब में गया है – यह तो फिलहाल पता नहीं चला है। जैसे ही पता चलेगा हम यह जानकारी आप तक पहुंचाएंगे। लेकिन अभी इतना तो बताया ही जा सकता है कि किस अख़बार को कितने पन्नों का विज्ञापन दिया गया है।

पहली नज़र में सबसे अधिक फायदा हिंदुस्तान को मिलता हुआ दिख रहा है। पटना संस्करण के हिंदुस्तान में दस पन्नों का विज्ञापन छपा है और देश की राजधानी दिल्ली में आठ पन्नों का। नीतीश कुमार की सरकार ने इतनी मेहरबानी किसी और अख़बार पर नहीं की है। लगता है कि हिंदुस्तान को बिहार समागम का असली फायदा अब जा कर मिला है।

दूसरे नंबर पर है दैनिक जागरण। पटना में उसके संस्करण में नौ पन्नों का विज्ञापन छपा है। हिंदुस्तान के विज्ञापनों की भाषा और दैनिक जागरणों के विज्ञापनों की भाषा अलग-अलग है। कहीं दलित उत्थान को मुद्दा बनाया गया है तो कहीं राजशाही पर भारी पड़ती लोकशाही है। दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में बिहार सरकार के विज्ञापन नहीं छपे हैं, लेकिन दिल्ली संस्करण में बिहार सरकार के विज्ञापन छपे हैं। पूरे आठ पेज। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दैनिक जागरण पर नीतीश सरकार करीब-करीब उतनी ही मेहरबान हुई है, जितनी हिंदुस्तान पर हुई है।

राष्ट्रीय सहारा में पांच फुल पेज और तीन हाफ पेज के विज्ञापन छपे हैं। और प्रभात ख़बर के ई-पेपर पर नज़र डालने से लगता है कि नीतीश कुमार की उस अख़बार से कोई दुश्मनी है। तभी उसे बहुत कम विज्ञापन मिले हैं। जहां तक अंग्रेजी अख़बारों का सवाल है – बिहार से छपने वाले अंग्रेजी अख़बारों में करीब डेढ़ पेज के विज्ञापन छपे हैं।

अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार ने चार साल के जश्न में कितने रुपये खर्च किए होंगे। यह भी ध्यान रखिएगा कि चुनाव अभी साल भर दूर है और जैसे जैसे यह दूरी घटेगी। कामयाबी का जश्न तेज होगा। और मीडिया कंपनियों को इसी का इंतज़ार है।

((यह रिपोर्ट ई-पेपर से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। अगर आप बिहार में रहते हैं और वहां पर आज आपने किसी और अख़बार पर नज़र डाली है तो वहां मिले सरकारी विज्ञापनों का ब्योरा जरूर दीजिएगा। इससे इस रिपोर्ट को सुधारने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भी बताइयेगा कि नीतीश सरकार के सत्ता में चार साल पूरे होने पर क्या किसी अख़बार ने कोई रिपोर्टकार्ड छापी है या नहीं। क्या किसी अख़बार ने नीतीश कुमार को यह बताया है कि चार साल पहले उन्होंने राज्य की जनता से क्या वादे किए थे और उन वादों में कितनों को पूरा किया? क्या किसी अख़बार ने नीतीश सरकार को खुल पर उन वादों की तरफ़ ध्यान दिलाया है जो अधूरे रह गए या जिन्हें सत्ता हासिल करने के बाद उठा कर कूड़ेदान में फेंक दिया गया?))

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6 Responses to 4 साल पूरे होने पर नीतीश सरकार ने अख़बारों पर लुटाया खजाना

  1. aam admi Reply

    November 24, 2009 at 3:50 pm

    samrendra ji,

    apki is report se jyada jaandaar to antim me bracket me likhi gayi baat hai. Ummid hai in tamam muddon par jald hi jantantra par ek dhardar aur bebak vishleshan dekne ko milega.

    maza dekhiye ki chunav to saal bhar dur hai par abhi se hi bhai log Nitish Sarkar ki pairokari me yeh tark dene lage hain ki 15 saalon me jo bimari lagi hai is rajya ko use thik karne ke liye kam-se-kam 10 sal ka vakt to diya hi jaana chahiye. ab in ‘Baudhikon’ se yah jaroor puchcha jana chahiye ki aakhir offensive khelte-khelte yeh defensive approach kyun apna liya bhai? agar bihar vakai badal raha hai to Nitishji soochna kanoon ko kyun ‘badal’ rahe hain? aane dijiye hakikat ko bindas samne. Dar kahe rahe bhai?

    • Anand Prasad Reply

      November 24, 2009 at 5:04 pm

      arey bhaiyya….. aap apna naam badal lein, kyoonki apki awaz aam aadmi ki awaz nahi hain….. bihar ke janmanas ko aapne sahi dhang se represent nahi kiya hai…..!!!! jo kaam 15 varshon mey nahi ho saka, usey aap 4-varshon mey hi nitishjee se poori karne ki apekshha kaise rakhtey ho….????? ….rahi baat akhbaron mey prachar- prasar ki,nishay hi, in phijulkharchion se bacha jaa sakta tha… lekin apne kriy-kalaapon ko vyawahrik roop dene ke saath likhit taur per logon ke bich pahunchaney ka kisi bhi sarkar ka itna haq to banta hi hai…!!!!!!

  2. Vishnu Rajgadia Reply

    November 26, 2009 at 10:14 am

    नीतीश कुमार को सुशासन बाबू कहा जाता है। दुनिया भर में यह बात साबित हो चुकी है कि सुशासन का सबसे जरूरी हथियार है सूचना का अधिकार। नीतीश सरकार ने गत 17 नवंबर को ऐसे अवैध नियम बना डाले हैं कि बिहार में सूचना कानून बेमानी हो जायेगा। इस तरह, गारंटी है कि बिहार में सुशासन नहीं आयेगा। बाद में नीतीश कुमार और उनकी चाटुकारिता करने वाले बुद्धिजीवी यह विश्लेषण करेंगे कि किन वजहों से बिहार में सुशासन लाने का सपना अधूरा रह गया। इसके लिए नौकरशाही और सिस्टम को सबसे बड़ा खलनायक बताया जायेगा। यह सब जानते हुए भी सूचना कानून की धज्जियां उड़ाने वाले संशोधन पर बिहार में मीडिया की चुप्पी भयावह संकेत है। जनतंत्र को धन्यवाद जिसने चार वर्ष पूरे होने पर जनता का खजाना लुटने की खबर दी। जनता के खजाने के साथ मीडिया की विश्वसनीयता भी लुटी है। सूचना कानून मामले में मीडिया की भूमिका पर भी आप एक तथ्यपरक रिपोर्ट ले सकें तो बेहतर होगा।
    बिहार में सूचना पाने के नियमों में अवैध संशोधन के संदभ में प्रतिवाद पत्र पर आनलाइन हस्ताक्षर के लिए लिंक
    http://www.PetitionOnline.com/rtibihar/petition.html

  3. Rajnish Kumar Reply

    November 26, 2009 at 7:02 pm

    एक तरफ तो बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार कहते हैं कि भ्रष्टाचार को मैं जनता की नजरों से देखूँगा, दूसरी तरफ सूचना का अधिकार अधिनियम को कुँद कर इन्होने जनता की आँखें फोड़ दी । ध्यान देने योग्य बात है कि वैसे तो नीतीश सरकार को हर तरफ से वाहवाही ही मिल रही थी, केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही ये जवाब देने लायक स्थिति में नहीं हैं । उपमुख्यमंत्री श्री मोदी भी स्वीकार कर चुके हैं कि हम तो यहाँ से पाइप में भरपूर पानी डालते हैं लेकिन पाइप में लिकेज के चलते अंतिम आदमी की प्यास नहीं बुझ पाती । भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु सूचना के अधिकार कानून से बढ़कर कोई कानून अभी तक नहीं आया था । अभी तो यह प्रयोगावस्था में ही था कि मुख्यमंत्री बिहार ने इसकी भ्रूण-हत्या कर डाली ।

  4. Anup Reply

    November 28, 2009 at 9:53 pm

    Jo media aaj Nitish Govt se oblige hokar charn vandana kar raha hai, whi media jald hi apani khoyi hui credibility wapas lane ke liye Nitish ke SUSHASHAN ki pol kholne ko vivash hoga. Public jab lattth le ke daudayegi tab ye Advt koi kam nahi aayega

  5. Sanjeev ZKumar Reply

    December 2, 2009 at 12:01 am

    Bihar ke media ki halat par taras aata hai. Nitish ji bhi aise totako se bahut din public ko bharma nahi payenge. Jald hi wo bhi benakab ho jayenge

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