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IRS सर्वे: डींग हांकने में सब अख़बार आगे

इस बार भी रीडरशिप सर्वे में हर किसी के लिए कुछ न कुछ है। दैनिक भास्कर के पाठकों की संख्या में तेज़ गिरावट हो रही है, लेकिन उसका दावा है कि वो नंबर वन समूह है। प्रभात ख़बर का दावा है कि उसने हिंदुस्तान समेत सबको पटक दिया है, लेकिन फीसदी के हिसाब से। उसी तरह एनबीटी का दावा है कि वो नंबर वन के सिंहासन पर जा बैठा है। हिंदुस्तान अपनी तेज़ी पर इतरा रहा है। आंकड़ों के इस खेल ने पाठकों को उलझा दिया है। आप भी इस खेल पर एक नज़र डालिए। - मॉडरेटर

दैनिक भास्कर – लगातार पिट रहे हैं, फिर भी नंबर वन समूह

भास्कर देश का नंबर वन समूह

इंडियन रीडरशिप सर्वे-2009 आर-2 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भास्कर समूह प्रतिदिन 1.73 करोड़ पाठकों के साथ भारत का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र समूह घोषित किया गया है। दूसरे स्थान पर दैनिक जागरण और तीसरे पर टाइम्स ऑफ इंडिया है। समूह का अंग्रेजी अखबार डीएनए मुंबई, पुणो, अहमदाबाद और जयपुर में नंबर दो पर बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि भास्कर अपने सभी क्षेत्रों में अग्रणी अखबार है और लगातार आगे बढ़ रहा है।

उत्कर्ष पत्रकारिता, पाठकों से लगातार जीवंत संपर्क और बेहतरीन मार्केटिंग की वजह से लगातार नये पाठक भास्कर समूह के साथ जुड़ रहे हैं। यही नहीं समूह ने संपादकीय दक्षता और पाठकों के ज्यादा से ज्यादा करीब पहुंचने के लिए पिछले एक साल में लगातार प्रयास किये। समय-समय पर पाठकों से उनकी पसंद और जरूरत जानने के लिए सर्वे किये गये। उनके अनुरूप अखबार बनाने के लिए रिपोर्टरों को ट्रेनिंग दी गयी। पाठकों को मौके से ही रिपोर्ट मिल सके, इसलिए रिपोर्टरों को लैपटॉप और कैमरे भी मुहैया कराये गये।

इस साल कई केंद्रों को विस्तार देते हुए पूर्ण संस्करणों में बदल दिया, जिनमें शिमला, पाली, भिलाई और रतलाम शामिल हैं। इसके अलावा समूह ने शोधपरक और खोजपरक पत्रकारिता के लिए, डीबी स्टार के रूप में देश का पहला हिंदी कॉम्पैक्ट अखबार भी शुरू किया। यह अभी भोपाल, इंदौर और जोधपुर से प्रकाशित हो रहा है।

आज एक बार फिर भास्कर समूह को देश में नंबर 1 घोषित किया गया है तो इसका पूरा श्रेय पाठकों को ही जाता है। समूह ने जयपुर और अहमदाबाद में 350 करोड़ की लागत से पिंट्रिंग प्लेनेट के रूप में विशाल प्लांट स्थापित किये हैं। समूह देश के विभिन्‍न राज्यों में 42 संस्करणों का प्रकाशन कर रहा है। इसके अतिरिक्त 106 पुलआउट एडिशंस भी इन संस्करणों के साथ प्रकाशित हो रहे हैं।

नवभारत टाइम्स: खली की तरह सबको पटक दिया

एनबीटी बना दिल्ली का बिग बॉस

दूसरे प्रतियोगी संस्थानों के अखबारों को तो एनबीटी ने पछाड़ा ही है, अपनी सिस्टर पब्लिकेशन टाइम्स ऑफ इंडिया से आगे निकलते हुए नवभारत टाइम्स खुद नंबर वन के सिंहासन पर जा बैठा है। दूसरे नंबर पर टाइम्स ऑफ इंडिया का कब्जा है। सर्वे ने साबित कर दिया है कि टाइम्स ग्रुप के दोनों बड़े अखबारों की आपके दिलों में गहरी पैठ है।

इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के दूसरे राउंड में यह नतीजे आये हैं। आईआरएस एक स्वतंत्र संस्था है जिसमें ऐडवर्टाइजर, विज्ञापन एजंसियां और मीडिया हाउस हिस्सा लेते हैं। सर्वे के राउंड वन में एनबीटी ने हिंदुस्तान टाइम्स को पछाड़ा था और राउंड टू में टाइम्स ऑफ इंडिया से थोड़ा आगे निकलते हुए अव्वल नंबर पाया है।

एनबीटी के पास दिल्ली में 28.70 लाख पाठक हैं, जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठक 28.11 लाख हैं। तीसरे नंबर पर रहे अंग्रेजी के अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के पाठकों की संख्या 27.76 लाख है। दिल्ली का चौथा बड़ा अखबार है पंजाब केसरी, जिसके पाठकों की तादाद 21.52 लाख है।

दिल्ली एनसीआर में भी एनबीटी ने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंद्वी दैनिक जागरण को 6 लाख के बड़े मार्जिन से पछाड़ा है। दिल्ली एनसीआर में सभी अखबारों को पीछे धकेलते हुए एनबीटी ने ग्रोथ की है।

यह सब कुछ मुमकिन हुआ है आपके उस प्यार और भरोसे की वजह से, जो आपने एनबीटी पर दिखाया है। हर मुद्दे पर उठी हमारी आवाज के साथ आपने अपनी आवाज मिलाई। 2007 में नए अंदाज में ऑल कलर एनबीटी लॉन्च होने के बाद हमने ‘दिल्ली मेरा दिल’ के जरिए पूरे गर्व से बताया कि दिल्ली न सिर्फ देश की पॉलिटिकल कैपिटल है, बल्कि कल्चर, कमर्शल, इन्फ्रास्ट्रक्चर और यूथ कैपिटल भी है। रीडरों के लिए इन्फॉमेर्शन और एंटरटेनमेंट की सुपरडोज के लिए हम आपके लिए लाए स्पेशल संडे कवरेज, खूबसूरत मास्टहेड, हसीन और जवान होता हैलो दिल्ली। हर त्योहार और सेलिब्रेशन में भी एनबीटी हमेशा आपके साथ इन्जॉय करता आया है। फिर चाहे वह दशहरा दर्पण हो, जन्माष्टमी, बैसाखी, ईद या क्षमावणी। मेट्रो पेजों में हर एंगल से शहर पर पैनी नजर रखने में भी एनबीटी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। चलो कैंपस के जरिए जहां हमने यूथ का ध्यान रखा, वहीं दिल्ली से ग्रेटर दिल्ली कैम्पेन के जरिए आपको बताया कि आपकी और हमारी दिल्ली कैसे आगे बढ़ रही है।

एनबीटी को फख्र है कि वह दिल्ली के ग्रेटर दिल्ली बनने के इस सुहाने सफर में एक आईना बना, एक दोस्त और एक गाइड का रोल निभाया। आखिर आपका पेपर एनबीटी दिल्ली की धड़कन, दिल्ली का नंबर वन अखबार जो है।

हिंदुस्तान: सबसे ज़्यादा ऊंचाई पर लहराया परचम

दनादन बढ़ रहा है हिंदुस्तान

आपके पसंदीदा अखबार हिन्दुस्तान ने एक बार फिर सबसे ज्यादा ऊंचाई पर परचम लहरा दिया है। प्रिंट मीडिया के रेसिंग ट्रैक पर एक बार फिर वह बोल्ट बनकर सबसे तेज दौड़ता नजर आया है। एक बार फिर यह साबित हो गया है कि देश में हिन्दुस्तान के पाठकों की संख्या सबसे ज्यादा रफ्तार से बढ़ रही है।

इंडियन रीडरशिप सर्वे 2009 के दूसरे राउंड के मुताबिक पिछले साल के दूसरे राउंड के मुकाबले हिन्दुस्तान के अखिल भारतीय पाठकों की संख्या में साल भर में लगभग 12 लाख का इजाफा हुआ है। हिंदी का कोई भी दूसरा अखबार पाठक वृद्धि के मोर्चे पर हिन्दुस्तान की इस बढ़त के आसपास भी नहीं ठहरता!

रीडरशिप सर्वे के राउंड 2 के मुताबिक अब देश भर में हिन्दुस्तान के पाठकों की कुल संख्या 2 करोड़ 79 लाख 44 हजार हो चुकी है! इतना ही उत्साह बढ़ाने वाला फैक्ट यह है कि राजधानी में हिन्दुस्तान का सबसे तेज रफ्तार होने का खिताब कायम है। दिल्ली में हिन्दुस्तान अकेला हिंदी अखबार है जिसकी टोटल रीडरशिप पिछले एक साल में बढ़ी है।
बिहार में हमेशा की तरह हिन्दुस्तान की ही तूती बोल रही है। वहां हिन्दुस्तान परम्परा से हर घर का अखबार है और हमेशा की तरह वहां उसकी निर्विवाद लीडरशिप इस राउंड में भी जारी रही। राउंड 2 के आंकड़े बता रहे हैं कि औसतन बिहार के हर चार पाठकों में तीन हिन्दुस्तान पढ़ते हैं।

यही स्थिति झारखंड की है। वहां हिन्दुस्तान लगातार नम्बर एक की कुर्सी पर विराजमान है। वहां भी उसके पाठकों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है। झारखंड के औसतन हर तीन पाठकों में से दो हिन्दुस्तान पढ़ते हैं।

उत्तर प्रदेश में भी हिन्दुस्तान अकेला हिन्दी अखबार है जिसके पाठकों की संख्या बिना ठिठके, लगातार तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों जगह हिन्दुस्तान ने तेजी से विस्तार किया है। पिछले तीन वर्षो में देहरादून, मेरठ, आगरा, कानपुर एवं बरेली से प्रकाशन आरंभ करके हिन्दुस्तान ने इस क्षेत्र में अपनी कुल पाठक संख्या में लगभग 10 लाख का इजाफा किया है। आज इस क्षेत्र के लगभग 85 फीसदी लोगों तक हिन्दुस्तान की पहुंच है।

प्रभात ख़बर: फीसदी के हिसाब से हिंदुस्तान को भी मात देने का दावा

दो लाख 48 हजार नये पाठक बने

इंडियन रिडरशिप सर्वे 2009 (राउंड – दो) की नयी रिपोर्ट के अनुसार, प्रभात खबर की पाठक संख्या में दो लाख 48 हजार की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही प्रभात खबर के पाठकों की कुल संख्या बढ़ कर 49 लाख 19 हजार हो गयी है। प्रभात खबर हिंदी अखबारों में नौवें स्थान पर आ गया है।

पिछली रिपोर्ट की तुलना में प्रभात खबर ने देश में 5.31 फीसदी की वृद्धि दर्ज करायी है। वहीं, हिंदुस्तान की वृद्धि 4.39 प्रतिशत रही। दैनिक जागरण की वृद्धि 0.38 फीसदी ही रही। झारखंड में प्रभात खबर ने 5.05 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ एक लाख 51 हजार नये पाठकों को जोड़ा है। वहीं हिंदुस्तान और दैनिक जागरण की वृद्धि दर प्रभात खबर से कम रही।

झारखंड के तीन महत्वपूर्ण शहर रांची, जमशेदपुर और धनबाद में प्रभात खबर की कुल पाठक संख्या नौ लाख 54 हजार हो गयी है। बिहार में प्रभात खबर की पाठक संख्या में 7.45 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है। वहीं हिंदुस्तान की वृद्धि दर 1.80 फीसदी और दैनिक जागरण की 3.89 प्रतिशत रही। पश्चिम बंगाल प्रभात खबर की पाठक संख्या में 29 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है। विदित हो कि प्रभात खबर एबीसी (जनवरी-जून 09) की रिपोर्ट के आधार पर भी झारखंड में सबसे ज्यादा पढ़ा जानेवाला अखबार है।

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One Response to IRS सर्वे: डींग हांकने में सब अख़बार आगे

  1. media ka madhav Reply

    November 25, 2009 at 10:40 am

    haatri aur andho kee kahani dajar hui…..?

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