देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घोटाले की जांच अब अमर उजाला विवाद के कारण उलझ गई है। कंपनी लॉ बोर्ड की जो टीम सत्यम घोटाले की जांच में जुटी थी उस पर बोर्ड के ऐक्टिंग चीफ आर वासुदेवन निगरानी कर रहे थे। आर वासुदेवन को सीबीआई की टीम में अमर उजाला केस में गिरफ़्तार कर लिया है और उनके घर से 55 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इससे सत्यम घोटाले की जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं।
सीबीआई ने एक दिन पहले स्पेशल कोर्ट में दो सौ पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसके मुताबिक सत्यम घोटाला 14 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। भारतीय इतिहास में अब तक इतना बड़ा कॉरपोरेट घोटाला नहीं हुआ है। चार्जशीट के मुताबिक सत्यम के पूर्व चेयरमैन रामलिंगम राजू और दूसरे आरोपियों ने साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की निजी संपत्तियां बनाई। इसके अलावा उन्होंने 12 सौ करोड़ रुपये का लोन भी लिया था ताकि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का पारित प्रस्ताव बदला जा सके। यही नहीं उन्होंने मुनाफे को 450 करोड़ रुपये अधिक दिखाया था।
कंपनी लॉ बोर्ड में सत्यम घोटाले की जांच में बोर्ड के ऐक्टिंग चीफ़ आर वासुदेवन की भूमिका भी रही है। लेकिन अब अमर उजाला केस में उनकी गिरफ्तारी और उनके घर से 55 लाख रुपये की बरामदगी से उनकी निष्पक्षता पर संदेह होने लगा है। कंपनी लॉ बोर्ड एक अर्धन्यायिक संस्था है। जो कंपनियों के विवादों का निपटारा करती है। उसके फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
इस बीच कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने सत्यम घोटाले की दोबारा जांच की संभावना से इनकार किया है। उनके मुताबिक उस जांच में वासुदेवन अकेले नहीं थे बल्कि कई जगह पर चेक प्वाइंट बनाए गए थे। इसलिए उस जांच पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। सलमान खुर्शीद के इस बयान के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि जब वासुदेवन भ्रष्टाचार के मामले में फंस सकते हैं तो फिर भ्रष्टाचार हुआ ही नहीं होगा इसकी गारंटी कैसे दी जा सकती है।
उधर सीबीआई की चार्जशीट में घोटाले की रकम बढ़ कर 14 हज़ार करोड़ रुपये होने और कंपनी लॉ बोर्ड के ऐक्टिंग चेयरमैन वासुदेवन की गिरफ़्तारी के बाद महिंद्रा सत्यम के शेयरों की कीमत में करीब 11 फीसदी की गिरावट आई है। बाज़ार खुलने से पहले सत्यम के शेयर का भाव 101.65 रुपये था जो कारोबार बंद पर 90.55 रुपये तक गिर गया था।
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