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नई दुनिया की “ईमानदार” मुहिम

नई दुनिया में अनिल अंबानी की कंपनियों के ख़िलाफ़ चल रही “ईमानदार” मुहिम की कुछ झलकियां। यहां विनोद अग्निहोत्री की दो रिपोर्ट पेश की जा रही हैं। पहली रिपोर्ट 11 अक्टूबर को छापी गई थी। यहां मौजूद दूसरी रिपोर्ट 17 अक्टूबर को छापी गई थी।

अनिल अंबानी के साम्राज्य पर आती नहीं आँच

- विनोद अग्निहोत्री, नई दिल्ली
रिलायंस कम्युनिकेशंस का मशहूर नारा था- “कर लो दुनिया मुट्ठी में।” इस कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी ने दुनिया तो नहीं, देश की सरकार जरूर अपनी मुट्ठी में कर ली है। सत्ता के गलियारों में, उद्योग जगत की गगनचुंबी इमारतों में और अफसरों के केबिनों में सब कहते हैं कि केंद्र और राज्यों में किसी की भी सरकार हो, लेकिन तूती अनिलभाई की ही बोल रही है। राज्यसभा सांसद के रूप में सत्ता के गलियारों के भीतर तक जा चुके अनिलभाई का दबदबा ऐसा है कि हर सप्ताह, आमतौर पर हर बुधवार कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव और दूसरे कई महत्वपूर्ण सचिव व उच्च अधिकारी छोटे अंबानी की अगवानी अपने दफ्तरों में करते हैं। इसके लिए अनिल हर हफ्ते मुंबई से दिल्ली आते हैं। “नईदुनिया” से प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

अनिल के करीबी सूत्र भी कहते हैं कि ऐसा वे पिछले कई सालों से कर रहे हैं और महत्वपूर्ण लोगों से अपने रिश्ते तरोताजा करते रहना उनकी पुरानी कार्यशैली है। सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कौन तैनात होगा, इसमें अनिल की दिलचस्पी जगजाहिर है। सत्ता के गलियारों में केंद्र सरकार के कई सचिवों और दूसरे बड़े अधिकारियों की तैनाती और बदली में अनिल व उनके दोस्त राजनेताओं की भूमिका की चर्चा आम है। पूर्वोत्तर समेत देश के कई राज्यों में मुख्यमंत्री की कुर्सी के फैसले में भी उनके लोगों का दखल जगजाहिर रहा है।

यही वजह है कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह यानी एडीएजी की कई कंपनियों में अरबों रुपए की पूँजी के हस्तांतरण में लगे आरोपों की शिकायतें रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सेबी और दूसरे मंत्रालयों में ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। अदालत के आदेश और संसद में सवालों का भी सरकार पर कोई असर नहीं होता।

अंबानी घराने में बँटवारे के बाद अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) ने पिछले कुछ वर्षों में सफलता की कई नई ऊँचाइयाँ चढ़ी हैं। अमीरी में अनिल अपने बड़े भाई मुकेश से थोड़ा ही पीछे हैं। बिजली, टेलीकॉम, सूचना तकनीक, इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में इस समूह ने रिलायंस नामधारी अपनी कई कंपनियों को उतारा है। लेकिन इन कंपनियों के जरिए देश और विदेश में करीब ४८ हजार ४७५ करोड़ रुपए को किस तरह इधर से उधर करके मोटी कमाई की गई है, वह भी कम दिलचस्प नहीं है।

इसके लिए इन कंपनियों द्वारा सरकारी कानूनों, सेबी और रिजर्व बैंक के नियमों और वित्तीय प्रावधानों के उल्लंघन की कई शिकायतें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास पहुँची हैं। रिजर्व बैंक ने भी कई मामलों में एतराज जताते हुए अपने निर्देश जारी किए हैं। सांसदों ने संसद और सरकार के सामने सवाल उठाए हैं। विदेशी मुद्रा विनिमय कानून (फेमा) के उल्लंघन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने एक मामले में इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड से जानकारी भी माँगी है। “नईदुनिया” ने इस आशय के जरूरी दस्तावेज भी हासिल किए हैं।

अपनी खोजबीन में “नईदुनिया” को एडीएजी समूह की कंपनियों द्वारा फेमा, सेबी, ईसीबी, आरबीआई और अन्य वित्तीय प्रावधानों व नियमों का उल्लंघन करके अरबों रुपए की रकम इधर-उधर करने के कई मामलों का पता चला है। एडीएजी समूह की कंपनी रिलायंस इन्फ्रा द्वारा ईसीबी (एक्सटर्नल क्रेडिट बारोइंग) नियमों के विपरीत नवंबर 2006 में दादरी बिजली परियोजना के लिए 16.56 अरब रुपए जुटाकर उनका भारत में शेयर बाजार में निवेश कर दिया गया।

रिजर्व बैंक की शिकायत पर यह मामला प्रवर्तन निदेशालय के पास है। आरएनआरएल द्वारा अक्टूबर 2006 में जुटाई गई 13.80 अरब रुपए की एफसीसीबी की रकम में से 12 अरब 65 करोड़ की रकम ईसीबी नियमों के विपरीत भारत में शेयर बाजार में लगाई गई। यह मामला भी प्रवर्तन निदेशालय के पास है। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) द्वारा मार्च 2007 में 92 अरब रु. की ईसीबी व एफसीसीबी की रकम से 55.20 अरब रु. की रकम को अपनी उप कंपनी को बतौर ब्याजमुक्त कर्ज दे दिया, जिसे उस कंपनी ने शेयर बाजार में लगा दिया।

यह मामला रिजर्व बैंक के पास विचाराधीन है। 2006-07 में आरएनआरएल द्वारा 13.80 अरब रु. की एफसीसीबी व रिलायंस इन्फ्रा ने 23.46 अरब रु. की ईसीबी को लंदन में जमा करके ओवरड्राफ्ट लेने, उस रकम को कुछ हीरा व्यापारियों के खातों में स्थानांतरित करके उसे मॉरीशस के रास्ते भारतीय शेयर बाजार में लगाने के आरोपों की जाँच भी प्रवर्तन निदेशालय के पास विचाराधीन है।

हर बुधवार दिल्ली दरबार में : एडीएजी कंपनी समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी हर सप्ताह आमतौर पर बुधवार को दिल्ली आकर कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर और प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के प्रमुख सचिव टीके नायर समेत कई सचिवों और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों से मुलाकात करते हैं। इसकी पुष्टि “नईदुनिया” से सरकारी सूत्रों ने की है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि बड़े उद्योगपतियों की इन मुलाकातों में कोई अनहोनी बात नहीं है। सरकार के साथ राय-मशविरे के लिए ऐसी मुलाकातें होती रहती हैं। यह पूछने पर कि क्या दूसरे उद्योगपति भी इसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों से नियमित मिलते हैं और क्या उनके लिए भी कैबिनेट सचिव और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के पास समय है, तो सरकारी सूत्रों ने कहा कि समय लेकर कोई भी उनसे मिल सकता है।

सत्ता के गलियारे पर अनिल का कब्जा
अंबानी के चक्करों पर सांसद उठाने लगे सवाल
नई दिल्ली, शनिवार, 17 अक्टूबर 2009( 10:26 IST )

-विनोद अग्निहोत्री

अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के खातों की सरकार द्वारा कराई गई विशेष ऑडिट रिपोर्ट के मीडिया में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सरकार के शीर्ष अधिकारियों के साथ एडीएजी के अध्यक्ष अनिल अंबानी की नियमित और लगातार मुलाकातों की चर्चा तेज हो गई है।

पिछले बुधवार भी अनिल दिल्ली आए और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से उन्होंने मुलाकात की। उधर सीवीसी ने 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा दिए 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस में 60 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपों की जाँच सीबीआई को देने की कार्रवाई से टेलीकॉम उद्योग में हड़कंप है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि दूरसंचार मंत्री ए. राजा के पिछले कार्यकाल के इस मामले की जाँच से कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में दरार पड़ने के साथ स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लाभार्थियों में एक स्वैन टेलीकॉम लि. के पीछे एडीएजी की पूँजी होने की शिकायतें भी जाँच के घेरे में आ सकती हैं।

इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि देश के तमाम उद्योगपति यदाकदा ही दिल्ली आकर सरकारी अधिकारियों से मिलते हैं। आमतौर पर दिल्ली स्थित उनके जनसंपर्क विभाग के लोग ही सत्ता के गलियारों में मिलते-जुलते हैं। लेकिन अनिल अंबानी देश के शायद अकेले ऐसे शीर्ष उद्योगपति हैं जो नियमित रूप से हर सप्ताह दिल्ली आकर केंद्र के शीर्ष लोगों से मिलते हैं। इनमें मंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय समेत कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

आम तौर पर संचार, वित्त, ऊर्जा, वाणिज्य, उद्योग मंत्रालय आदि में उनका ज्यादा आना-जाना है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी इन मुलाकातों को देश के एक शीर्ष उद्योगपति द्वारा सरकार को अपना बहुमूल्य परामर्श देकर देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देने का तरीका बताते हैं। दिल्ली स्थित एडीएजी के शीर्ष अधिकारी और अनिल के करीबी भी कहते हैं कि अनिल भाई अपने संबंधों को हमेशा ताजातरीन रखते हैं। अपने रिश्तों को वे कभी भूलते नहीं हैं।

उधर कई सांसदों के पत्रों में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों से प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और सीवीसी के अधिकारियों में हलचल है। लोकसभा में वाम मोर्चे के नेता वासुदेव आचार्य, सांसद धर्मपाल सभरवाल, सांसद भरत कुमार राउद द्वारा प्रधानमंत्री, सीवीसी और अन्य संबंधित एजेंसियों को लिखे गए कई पत्रों में एडीएजी समूह की कंपनियों द्वारा अरबों रुपए की विदेशी पूँजी के विनिमय और निवेश का विस्तृत ब्योरा देते हुए उन पर ईसीबी, एफसीसीबी नियमों, फेमा, सेबी के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार भी एडीएजी की कंपनियों द्वारा ईसीबी और एफसीसीबी नियमों, फेमा और वित्तीय कानूनों के उल्लंघन की बात मान चुकी है।

सरकार के शीर्ष अधिकारियों से एडीएजी अध्यक्ष की नियमित मुलाकातें सियासी हलकों में यह उत्सुकता जरूर जगाती हैं कि आखिर हर सप्ताह सरकार के वरिष्ठ अधिकारी देश के इस शीर्ष उद्योगपति से क्या परामर्श लेते हैं, जिसे सरकार को देने के लिए दूसरे बड़े उद्योगपतियों के पास फुर्सत नहीं है या फिर सरकार के अधिकारियों के पास उनके लिए समय नहीं है।

हालाँकि रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों की सरकार द्वारा कराए गए विशेष ऑडिट से उठे विवाद पर अनिल अंबानी ने कहा है कि यह सब उनके कॉर्पोरेट विरोधियों द्वारा एडीएजी को बदनाम करने की साजिश है। अनिल के मुताबिक मीडिया में उनके समूह के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। एडीएजी को लेकर उठने वाले सवालों पर “नईदुनिया” ने एडीएजी के दिल्ली स्थित प्रवक्ता से पिछले कई दिनों से लगातार संपर्क करने की कोशिश की। व्यक्तिगत मुलाकात, टेलीफोन और ईमेल के जरिए उनसे उनका पक्ष माँगा गया लेकिन यह खबर लिखे जाने तक एडीएजी ने अपने जवाब नईदुनिया को नहीं भेजे।

अपने समूह पर उठ रहे सवालों पर एडीएजी अध्यक्ष की सार्वजनिक प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन एडीएजी कंपनियों की उपकंपनियों के खातों से अरबों रुपए की विदेशी पूँजी के हस्तांतरण पर इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा माँगी गई जानकारी, एडीएजी की कंपनी पर रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए करीब सवा सौ करोड़ रुपए के जुर्माने, विशेष ऑडिट रिपोर्ट में ऑरकाम के राजस्व आँकड़ों में गड़बड़ी पाए जाने और शेयर वारंट जारी करने के मामलों को उच्च न्यायालय द्वारा सेबी को सौंपने के तथ्यों को अनदेखा कैसे किया जा सकता है।

इसके साथ ही एडीएजी की दादरी बिजली परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अदालत में मिली चुनौती और परियोजना शुरू होने में अनिश्चय, दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली एडीएजी की कंपनी बीएसईएस के मीटरों में गड़बड़ी की शिकायतों, आरोपों की जाँच के दबाव में कंपनी के सीईओ को बदल देने, एयर इंडिया के इंश्योरेंस के ठेके को एडीएजी की कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को दिए जाने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यू इंडिया इंश्योरेंस द्वारा सीवीसी को भेजी शिकायत में उठे सवाल भी किसी से छिपे हुए नहीं हैं।

इनसे है नियमित मुलाकात-
1. कैबिनेट सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी
2. प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव एवं अन्य अधिकारी
3. वित्त मंत्रालय के अधिकारी
4. संचार मंत्रालय के अधिकारी
5. कानून मंत्रालय के अधिकारी
6. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी
7. पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी
8. वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी
9. उद्योग मंत्रालय के अधिकारी
10. भूतल परिवहन मंत्रालय के अधिकारी

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