पहला राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान सुप्रसिद्ध लेखिका विभा रानी को दिया गया है। राजीव सारस्वत हिंदुस्तान पेट्रोलियम में प्रबंधक (राजभाषा) के रूप में कार्य कर रहे थे। पिछले साल यानी 2008 के 26/11 के आतंकवादी हमले के वे शिकार हो गये। हादसे के वक़्त वे ताज होटल में कंपनी की तरफ से दी गयी अपनी ड्यूटी पर थे। ताज होटल, ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, नरीमन हाउस -इन सभी पर उस रात आतंकवादियों ने कहर ढाया था, जिसकी चपेट में सैकडों लोग आ गये थे। राजीव सारस्वत भी उनमें से एक थे। राजीव न केवल एक कुशल अधिकारी थे, बल्कि एक कुशल वक्ता, चुटकीदार कवि, अच्छे मंच संचालक भी थे। मुंबई की कई साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से वे जुड़े हुए थे।
उनकी स्मृति में उनके नियोक्ता हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान का गठन किया। इसके तहत हिंदी को सृजनात्मक तरीके से आगे बढ़ानेवाले को यह सम्मान दिये जाने की घोषणा की गयी। इसी के तहत इस साल के पहले राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान से विभा रानी को 18 दिसंबर, 2009 को आयोजित कार्यक्रम में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के निदेशक (मानव संसाधन) वी विजियासारधि ने सम्मानित किया। सम्मान के तहत शॉल व प्रमाणपत्र के अतिरिक्त 10001/- की राशि का चेक दिया गया।
विभा रानी हिंदी व मैथिली की सुपरिचित कथाकार, नाटककार, रंगमंच की कुशल अभिनेत्री व सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हिंदी व मैथिली में अब तक उनकी बारह से भी अधिक किताबें आ चुकी हैं। दस से अधिक नाटक वे लिख चुकी हैं। सावधान पुरुरवा, दुलारीबाई, पोस्टर, कसाईबाड़ा, मि जिन्ना, लाइफ इज नॉट ए ड्रीम, बालचंदा जैसे नाटकों व चिट्ठी, धधक जैसी फिल्मों में काम कर चुकी हैं। फिल्म्स डिवीज़न की फिल्में जयशंकर प्रसाद व भारतेंदु हरिश्चंद्र का लेखन कर चुकी हैं। कई टीवी कार्यक्रमों के लिए उन्होंने वॉयसओवर का काम भी किया है। रेडियो की वे पुरानी आवाज़, नाटक कलाकार हैं और अभी भी रेडियो से कथाओं के माध्यम से जुडी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक विषयों पर वे अपनी खास शैली में छम्मकछल्लोकहिस ब्लॉग लिखती हैं। छुटपन की कविताएं तथा बस यूं ही नहीं उनके अन्य ब्लॉग हैं। इनके अलावा विभा नो योरसेल्फ बेटर, सेल्फ एक्सप्लोरेशन, टाइम मैनेजमेंट, गिल्ट मैनेजमेंट जैसे बिहेवियरल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करती हैं और मुख्यधारा के बच्चों के लिए थिएटर वर्कशॉप आदि का भी आयोजन करती हैं।
सामाजिक गतिविधियों में भी विभा की सक्रिय सहभागिता रही है। उनके सामाजिक योगदान में सबसे प्रमुख है – वंचित वर्ग के बच्चों को शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना, वृद्धाश्रमों के लिए कार्यक्रम आयोजित करना और उनसे भी महत्वपूर्ण है, मुंबई और पुणे की जेलों के बंदियों और महिला बंदियों के बच्चों के साथ कला, थिएटर, साहित्य आदि के माध्यम से उनके मध्य सार्थक हस्तक्षेप करना। वर्तमान में निर्मल आनंद सेतु कार्यक्रम के माध्यम से वे लगातार बंदियों के साथ संवाद कर रही हैं ताकि उनके जीवन में गुणात्मक परिवर्तन आये। सम्मान ग्रहण करते समय विभा ने सम्मान के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और कहा कि सम्मानस्वरूप मिली राशि का उपयोग समाज के विभिन्न वंचित वर्ग के लिए आयोजित कार्यक्रमों में किया जाएगा।
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