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	<title>Comments on: कुंबले-धोनी मॉडल से सबक लें बीजेपी और कांग्रेस</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: विवेक</title>
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		<dc:creator>विवेक</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Dec 2009 17:31:40 +0000</pubDate>
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		<description>मैं आपकी बात से सहमत हूं। जहां कहीं भी नेतृत्व का संकट होगा वहां पर अराजकता होगी। अराजकता का नतीजा कभी अच्छा नहीं होता। बीजेपी में यही हो रहा है और पूरे देश का हाल यही है। अगर बीजेपी की बात करें तो झारखंड का ताज़ा नतीजा उसी का गवाह है। देखिए कितनी बुरी तरह पार्टी हार गई है। सब विरोधियों से नहीं बल्कि एक दूसरे से लड़ रहे थे। यशवंत सिन्हा मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे थे। अब सारे सपन धरे रह गए। अभिषेक आपने बहुत अच्छा विश्लेषण किया है। इसके लिए आपको साधुवाद। क्रिकेट और सियासत की तुलना तो लाजवाब है। मन खुश हो गया। आमतौर पर ऐसा तुलनात्मक अध्ययन पढ़ने को नहीं मिलता।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं आपकी बात से सहमत हूं। जहां कहीं भी नेतृत्व का संकट होगा वहां पर अराजकता होगी। अराजकता का नतीजा कभी अच्छा नहीं होता। बीजेपी में यही हो रहा है और पूरे देश का हाल यही है। अगर बीजेपी की बात करें तो झारखंड का ताज़ा नतीजा उसी का गवाह है। देखिए कितनी बुरी तरह पार्टी हार गई है। सब विरोधियों से नहीं बल्कि एक दूसरे से लड़ रहे थे। यशवंत सिन्हा मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे थे। अब सारे सपन धरे रह गए। अभिषेक आपने बहुत अच्छा विश्लेषण किया है। इसके लिए आपको साधुवाद। क्रिकेट और सियासत की तुलना तो लाजवाब है। मन खुश हो गया। आमतौर पर ऐसा तुलनात्मक अध्ययन पढ़ने को नहीं मिलता।</p>
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		<title>By: सुशांत झा</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/12/23/abhishek-on-kumble-advani/comment-page-1/#comment-528</link>
		<dc:creator>सुशांत झा</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Dec 2009 17:21:24 +0000</pubDate>
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		<description>बढ़िया विश्लेषण...राजनीति, क्रिकेट और कॉरपोरेट का बढ़िया तुलनात्मक अध्ययन...।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बढ़िया विश्लेषण&#8230;राजनीति, क्रिकेट और कॉरपोरेट का बढ़िया तुलनात्मक अध्ययन&#8230;।</p>
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		<title>By: सुधीर सक्सेना</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/12/23/abhishek-on-kumble-advani/comment-page-1/#comment-527</link>
		<dc:creator>सुधीर सक्सेना</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Dec 2009 15:43:08 +0000</pubDate>
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		<description>क्या बेकार की बात कर रहे हैं वीरेंद्र यादव। अभिषेक दूबे का विश्लेषण तो निष्पक्ष है। लेकिन आपकी टिप्पणी नहीं। लगता है आप किसी लाल झंडे वाली पार्टी के कामरेड हैं। तभी तो आपको सिर्फ बीजेपी का दोष नज़र आता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>क्या बेकार की बात कर रहे हैं वीरेंद्र यादव। अभिषेक दूबे का विश्लेषण तो निष्पक्ष है। लेकिन आपकी टिप्पणी नहीं। लगता है आप किसी लाल झंडे वाली पार्टी के कामरेड हैं। तभी तो आपको सिर्फ बीजेपी का दोष नज़र आता है।</p>
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		<title>By: वीरेंद्र यादव</title>
		<link>http://jantantra.com/2009/12/23/abhishek-on-kumble-advani/comment-page-1/#comment-526</link>
		<dc:creator>वीरेंद्र यादव</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Dec 2009 14:15:25 +0000</pubDate>
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		<description>बढ़िया विश्लेषण है। लेकिन बीजेपी को तो इसी तरह नष्ट होना है। कृष्ण की ताकत के बल पर उन्मत्त हो गए उनके वंशजों का भी यही हाल हुआ था। दूसरों को लड़ाकर राज करने की सैद्धांतिक राजनीति करने वालों का ये हश्र नहीं होगा, तो क्या होगा? जो समाज में समरसता के विरोधी हैं, नफरत को मूल्य और जीवन की ताकत मानकर चलते हैं, वो आपस में मेलजोल से कैसे रह पाएंगे? नफरत और साजिश का संस्कार मन को कलुषित करेगा, तो उसका असर तो हर तरफ दिखेगा ही।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बढ़िया विश्लेषण है। लेकिन बीजेपी को तो इसी तरह नष्ट होना है। कृष्ण की ताकत के बल पर उन्मत्त हो गए उनके वंशजों का भी यही हाल हुआ था। दूसरों को लड़ाकर राज करने की सैद्धांतिक राजनीति करने वालों का ये हश्र नहीं होगा, तो क्या होगा? जो समाज में समरसता के विरोधी हैं, नफरत को मूल्य और जीवन की ताकत मानकर चलते हैं, वो आपस में मेलजोल से कैसे रह पाएंगे? नफरत और साजिश का संस्कार मन को कलुषित करेगा, तो उसका असर तो हर तरफ दिखेगा ही।</p>
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