एडिटर्स गिल्ड ने पेड न्यूज़ (पैसे लेकर विज्ञापनों को ख़बरों की शक्ल में छापने या फिर पैसे लेकर ख़बर बनाने) के गोरखधंधे का जोरदार विरोध किया है। संपादकों की संस्था के मुताबिक इससे पत्रकारिता का बुनियादी सिद्धांत कमजोर हुआ है। मंगलवार को एजीएम में एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि जो मीडिया संस्थान और संपादक इस गोरखधंधे में लिप्त हैं और जो उपभोक्ता उन्हें पेड न्यूज़ के लिए पैसे दे रहे हैं वो सभी आज़ाद और निष्पक्ष प्रेस की अहमियत को कम करने के अपराधी हैं।
एजीएम में बिज़नेस स्टैंडर्ड के संपादक टी एन निनन ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने और एडिटर्ड गिल्ड के अध्यक्ष राजदीप सरदेसाई ने 2010 को पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ अभियान चलाने के लिए समर्पित किया जाए। इस अहम मुद्दे पर हुई बातचीत में ज़्यादातर सदस्यों ने हिस्सा लिया।
बैठक में टी एन निनन की अगुवाई में चार सदस्यीय एथिक्स कमेटी (नैतिकता समिति) का गठन किया गया। साथ ही इस मामले में चुनाव आयोग से बात करने का फैसला लिया गया। गिल्ड के मुताबिक सियासी दल और नेता पेड न्यूज़ का फायदा उठाते हैं और इस खर्च को प्रचार खर्च से बाहर दिखाते हैं। इसे रोकने के लिए चुनाव कानूनों में ठोस संशोधन होने चाहिए। एथिक्स कमेटी के बाकी सदस्य हैं कॉलमिस्ट बी जी वर्गीज, मेनस्ट्रीम के संपादक सुमित चक्रवर्ती और मानुषि की संपादक मधु किश्वर।
एडिटर्ड गिल्ड ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों और पत्रकारों ने अपने अनैतिक कामों से भारतीय मीडिया का नाम ख़राब कर दिया है। गिल्ड ने देशभर के संपादकों से अपील की है कि वो किसी भी तरह के विज्ञापनों को ख़बरों की शक्ल में छापने का विरोध करें। उन्होंने मीडिया के सम्मान की रक्षा के लिए पेड न्यूज़ के नाम पर चल रहे गोरखधंधे का सभी पत्रकारों को विरोध करना चाहिए। ((स्रोत- द हिंदू))
SUNILPARBHAKAR
January 2, 2010 at 11:30 am
rajdeep g oor unkey sathion ko iss desh hit k kaam k liae hum sabki taraf sae zindabad.visfot waley sanjay tiwari g bi kafi time sae iss kale dhande k khila awaj buland kiey huey hai. aap sab ko happy new year orr zindabaad