नया साल 2010 आपके के लिए कैसा होगा, इससे ज्योतिषियों की दुकानें चमकी हुई हैं. अख़बार और पत्रिकाएं भरी हुई हैं. कोई कहता है कि मेष राशि यह करेगी, कर्क को यह देखना पड़ सकता है. वृष के लिए इस तरह का योग बनने जा रहा है, फलां फलां. तो कैसा होगा हमारे लिए यह साल. इस सवाल का जवाब पहली जनवरी की शुरुआत के साथ ही ढूंढते हैं.
ऑस्ट्रेलिया में आधी रात को जब घड़ी की सुई 12 पर पहुंची तो सिडनी का हार्बर ब्रिज अदभुत आतिशबाज़ी से चमचमा उठा. क़रीब 15 लाख लोगों के सामने 12 मिनट तक आकाश रंगीन होता रहा. आतिशबाज़ी देखते लोगों को वाकई में लगने लगा कि नया साल शानदार ढंग से आ रहा है. हर साल यह भव्य आयोजन प्रशासन की ओर से किया जाता है. इसे देखने के लिए किसी टिकट की ज़रूरत नहीं होती, यह मुफ़्त होता है.
ऑस्ट्रेलिया के बाद ताइवान और हांगकांग में भी नया साल आया. यहां भी हर छोटा बड़ा शहर सरकारी आतिशबाज़ी से जगमगा उठा. लोग एक दूसरे के गले मिलने लगे. चमचमाती रौशनी ने बता दिया कि यह रात कुछ ख़ास है.
यूरोप में भी ऐसा ही हुआ, आम हो या ख़ास नए साल के जश्न में शरीक होने का हक़ सबको मिला. जर्मनी के छोटे बड़े शहरों में आतिशबाज़ी का शानदार इंतज़ाम था. बर्लिन में तो ऐतिहासिक ब्रांडनबुर्ग गेट पर कई कलाकार अपना हुनर दिखा रहे थे. लाखों की भीड़ बिना किसी घबराहट, संशय या संकोच के लुत्फ़ उठा रही थी. 12 बजते ही ज़ोरदार हल्ला हुआ और फिर तो आकाश गवाही देने लगा कि नया साल आ चुका है. ब्रिटेन और फ्रांस समेत यूरोप के हर देश में ऐसा ही हुआ, चाहे वह अमीर हो या ग़रीब.
इन देशों में बड़ी संख्या में लोग पीकर लिमिट से बाहर भी हुए, लेकिन एक्सीडेंट भी नहीं हुए और छेड़खानी या बलात्कार जैसी झकझोर देने वाली ही वारदातें भी सामने नहीं आई.
अब बात करते अपने देश की. तेज़ी से महाशक्ति बनने जा रहे भारत की. 31 दिसंबर की रात हर बार की तरह महंगे फाइव स्टार होटलों में कुछ बॉलीवुड की अभिनेत्रियों ने डांस किया. यह डांस उन्होंने ही देखा जो कुछ घंटों के लिए हज़ारों या लाखों फूंकने की हैसियत रखते हैं. बड़े शहरों के कुछ युवा मोटी एंट्री फीस देकर डिस्को आदि में गए. इनके अलावा कई और पार्टियों का आयोजन भी किया गया, लेकिन यह भी आम आदमी की पहुंच से बाहर ही थीं. इनमें आने जाने के लिए कलेजा और कार चाहिए, क्योंकि मामला देर रात का है. शानदार ब्रांडेड कपड़े चाहिए क्योंकि लिबास से रईसी टपकनी चाहिए.
साइड में, अपने दोस्तों के साथ हमारे जैसे लोगों ने भी नए साल का स्वागत करना शुरू किया. समान इच्छाएं रखने वाले मित्रों के साथ एक जगह (किसी के घर पर) बैठे. महफ़िल किस्म की सज़ी. गोश्त, नमकीन समेत कई चीज़ें पुराने अख़बार के ऊपर प्लेट में सजा दी गई. आधी जनता मोबाइल पर व्यस्त थी. इन सबके बीच पीना पिलाना, डांस और टीवी देखना होता रहा. तीन चार बजे फिक्र होने लगी कि दफ़्तर भी जाना है, गुरु कैसे होगा?
इस दौरान बड़ी आबादी जिसमें हमारे घरवाले और उम्र में बड़े लोग आते हैं वो हमारी फिक्र करते रहे. ज़्यादातर लोगों का नया साल तो टीवी देखते हुए आया. मैंने सुबह पापा को फोन किया. नए साल की बधाई दी और पूछा कुछ ख़ास हुआ क्या? उन्होंने कहा, “क्या होता है यार, ऐसा ही हुआ. बस खाना वाना खाया और फिर सो गए.” फिर बहन से बात हुई उसने बताया रात में 11 बजे लाइट चली गई थी और सुबह 9 बजे तक तो कम से कम नहीं आई थी. यानी खाना खाने और सोने के अलावा कोई विकल्प था ही नहीं. बहरहाल तब भी घरवालों ने कहा, हैप्पी न्यू ईयर. मैंने मन ही मन कहा, लो जी हो गया हैप्पी न्यू ईयर.

ओंकार जनौटी
((युवा पत्रकार ओंकार जनौटी इन दिनों जर्मन रेडियो “डॉयचे वेले” को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जर्मनी के शहर बोन में रहते हैं))
संगम
January 3, 2010 at 9:18 am
नए साल के पहले दिन किसी काम से कनॉट प्लेस जाना पड़ा। रात में वहां जो हुड़दंग हुई थी। कुछ बच्चे हाथ में बोरी लिए कचरा बीन रहे थे। यही हमारा भारत है और यही हम हैं।
Kavi Hardayal Kushwaha
January 7, 2010 at 9:04 pm
एक रोटी का टुकड़ा जब इज्जत के वदले प़ता है
सच पूछो कि दोस्त मेरे, मुझे एक नया साल दिख जाता है
एक दशक मे कितने वदले ,नर नग्न पुरुष नाना वदले |
इस नग्न संस्कृति की खातिर, जब कानून नया लिख जाता है ||
….. सच पूछो कि दोस्त मेरे
हाय! वासना क्या कहना , अर्ध नग्न सामाजिक है गहना |
भाई के हाथो को छूते, भय भीत घरो मे रहती बहिना |
अस्तित्व हमारा पूछ राहा इस देश मे मुझे कब तक रहना ||
टीवी के चित्रों मे धुधले जब द्रश्य कोई दिख जाता है ||
……. सच पूछो कि दोस्त मेरे
भूखा भाई महानगरो की सड़को पर दिख जाता है |
मासूम उदासी मुख मंडल मजबूर कोई दिख जाता है ||
नया साल क्या हाल बुरा है, भूखे बच्चा-बच्ची रहो मे
कोई अर्ध नग्न फूल लिए दिख जाता है |
सच पूछो कि दोस्त मेरे…………………..
पिजा की रोटी की कीमत, ज़ब ढावे की रोटी के साग आयेगा |
माया राहुल जैसी चक्र सुरक्षा, भारत का जन जन पायेगा ||
सच पूछो कि दोस्त मेरे…………………..
कोला पेपासी ये जल धारा, जब टाके शेर विक जाएगा |
संसद के उस सभा कक्ष मे, कोई मजदूर,किसान जन हित का प्रश्न उठायेगा ||
ये कवि स्वाजनो सहित मिल, नव वर्ष उसी दिन मनायेगा ||
एक रोटी का टुकड़ा जब इज्जत के वदले प़ता है
सच पूछो कि दोस्त मेरे, मुझे एक नया साल दिख जाता है @
कवि काछिवांत
हरदयाल कुशवाहा