
जॉर्ज फर्नांडिस और लैला कबीर
जॉर्ज फर्नांडिस के आंगन में खुशियों की इस चहलकदमी की दो वजहें बताई जा रही हैं। हम उन दोनों वजहों को आपके सामने रख रहे हैं। किस पर यकीन करें और किस पर नहीं यह आज़ादी आपको है।
सूत्रों के मुताबिक इस पारिवारिक जमावड़े की पहली वजह जॉर्ज फर्नांडिस की सेहत है। जॉर्ज अपनी यादाश्त धीरे-धीरे खो रहे हैं। शरीर जवाब दे रहा है। बिना किसी मदद के वो चल-फिर नहीं पाते। सक्रिय सियासत से उन्होंने नाता काफी पहले तोड़ लिया था और अब पूरा समय घर में ही बिताते हैं। यह संकेत अच्छे नहीं हैं और घरवाले चाहते हैं कि इन अहम पलों में वो जॉर्ज के साथ रहे ताकि यादें सहेज सकें।
लेकिन यहीं दूसरी ख़बर जॉर्ज की संपत्ति से जुड़ा विवाद भी है। जॉर्ज के कुछ करीबी लोगों के मुताबिक जॉर्ज के साथ आज उनका “परिवार” है तो इसकी वजह उनकी करोड़ों की सपंत्ति भी हो सकती है। उनका “परिवार” यह नहीं चाहता कि जॉर्ज की मिल्कियत किसी “गैर” के हाथों में जाए।
2009 आम चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे के मुताबिक जॉर्ज फर्नांडिस करोड़ों के मालिक हैं। मुजफ्फरपुर से पर्चा भरते वक़्त जॉर्ज ने अपने हलफनामे में बताया था कि उनके बैंक खातों और सेविंग में करीब सात करोड़ रुपये हैं। इसके अलावा हुबली और बैंगलोर में करीब 10 एकड़ गैर कृषि जमीन है। यह जमीन उन्हें 2006 में उनकी मां से विरासत में मिली थी। सूत्रों की माने तो दक्षिणी बैंगलोर में मौजूद उनकी जमीन की कीमत करोड़ों रुपये (कुछ के मुताबिक और भी अधिक) में है।
जॉर्ज की इस संपत्ति को लेकर उनके परिवार में काफी कुछ चल रहा है। कुछ करीबी लोग यह भी बताते हैं कि करीब एक साल पहले उनकी एक संपत्ति बेचने की बात चली थी, तब यह विवाद सतह पर आ गया था। ख़बरों के मुताबिक अब एक बार फिर यह विवाद गहरा रहा है और इसी को सुलझाने के लिए पूरा परिवार एकजुट हुआ है। और करीबी यह भी बता रहे हैं कि उनके आने के बाद से जया जेटली आवास पर नहीं दिखी हैं। शायद वो अपने घर चली गई हैं।

जॉर्ज फर्नांडिस और जया जेटली
जॉर्ज के करीबी बताते हैं कि लैला के जाने के बाद जया जेटली ही जॉर्ज से जुड़े फैसले लेती थीं। जॉर्ज की सियासत और ज़िंदगी पर जया जेटली का काफी दखल था। लेकिन जमाने बाद पिछले साल आम चुनाव में जब नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडिस को मुजफ्फरपुर से टिकट देने से इनकार किया तब लैला ने इस मामले में बयान दिया था। उन्होंने नीतीश कुमार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि जो लोग भी जॉर्ज को चुनाव लड़ने के लिए उकसा रहे हैं वो उनके साथ ज्यादती कर रहे हैं। कुछ समय बाद जब जनता दल यूनाइटेड की तरफ से जॉर्ज राज्यसभा के लिए चुने गए और शपथ लेने के लिए संसद पहुंचे तो दुनिया ने लंबे समय बाद लैला और जॉर्ज को एक साथ देखा। जॉर्ज को सहारा देते हुए लैला उन्हें घर छोड़ने गईं।
तब छपी ख़बरों के मुताबिक शपथ ग्रहण वाले दिन लैला सुबह कृष्ण मेनन मार्ग पहुंची। वहां उन्हें पता चला कि जॉर्ज संसद के लिए निकल चुके हैं तो लैला संसद चली आईं। और वहीं पर जॉर्ज से उनकी भेंट हुईं। लैला से जब जॉर्ज के पास लौटने की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा था कि वो इसलिए जॉर्ज के पास नहीं पहुंची हैं कि यह उनके (जॉर्ज के) जीवन का कोई ऐतिहासिक लम्हा है, बल्कि इसलिए कि उन्होंने महसूस किया है कि जॉर्ज अब टूट रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक यहीं से दोनों के रिश्ते में एक नया मोड़ आया। जो हक़ लैला खुद-ब-खुद छोड़ गईं थी अब उसे वापस हासिल करने लगीं। करीबी बताते हैं कि इसके पीछे उनकी एक मंशा यह हो सकती है कि बेटे सुशांत को पिता की विरासत मिले। ऐसे में यह देखने लायक बात होगी कि जॉर्ज की संपत्ति से जुड़ा यह विवाद किस मोड़ पर जाकर समाप्त होता है। क्या लैला और सुशांत जॉर्ज के वारिस बनेंगे या फिर जया जेटली को भी जॉर्ज की कोई विरासत मिलेगी?
dilip mandal
January 4, 2010 at 7:08 pm
हमारे बचपन के सबसे शानदार नेता को इस रूप में देखना दुखद है। जॉर्ज अपने जीवन का बेहतरीन समय शायद 1977 और उससे पहले जी चुके हैं। उसके बाद वो उस पुराने जॉर्ज की छाया और प्रतिछाया ही हैं। उनका हीरो से एंटी हीरो बनना भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी व्यक्तिगत त्रासदियों में से एक हैं। आपने इस बेहतरीन आलेख से एक बार फिर कुछ बेहद पुरानी यादों को ताजा कर दिया। धन्यवाद। भाई शेष नारायण सिंह भी संभवत: इस बारे में कुछ लिखना चाहेंगे।
jawahar choudhary
January 6, 2010 at 9:25 am
जार्ज फरनांडिस पर आपका लेख एक पुराने लोकप्रिय राजनीतिज्ञ की स्मृति को ताजा कर गया ।
याद आता है कि किस तरह राष्ट्र्ीय राजनीति के केन्द्र में रहा करते थे जार्ज । संसद में उनकी बहसें-
भाषण भी जनता को बहुत पसंद आते थे । आपातकाल के बाद उभरे सर्वाधिक महत्वपूर्ण नेताओं में
जार्ज षामिल हैं । लेकिन उनके पास अथाह संपत्ती है ! यह जान कर आष्चर्य हुआ । परिवार को
मिलाने में इसी संपत्ती का योगदान होगा , क्योंकि समाज एंसा ही है ।
बहरहाल , जार्ज स्वस्थ रहें , लंबी आयु पाएं , यही कामना है ।
जवाहर चैधरी , 16 कौषल्यापुरी, चितावद रोड़, इन्दौर – 452001
फोन – 98263 61533 , 0731-2401670
media ka madhav
January 7, 2010 at 5:37 pm
yaad hai aapatkal ke baad chunavon me janjeeron me jakde george.unke vidrohi tewar,dual membership ke masle par janta party ka tootna,jansangh/bjp ke prati unki vitrishna aur fir nda ka hissa banne ka afsosnak manzar.george kash tum aaj soch pate to sochte ki kaisi aitihasik chook kee aapne.
सुशांत झा
January 9, 2010 at 12:01 pm
जनतंत्र को वधाई..ये खबर जनतंत्र पर चार दिन पहले छपी और अब मुख्यधारा की मीडिया में आ रही है।
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कुमार राकेश
January 9, 2010 at 7:25 pm
जॉर्ज से इस देश को बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन जॉर्ज ने सबको धोखा दिया। उन उम्मीदों को तोड़ दिया। फिर भी हमारी दुआ है कि उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो।