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	<title>Comments on: विभूति नारायण राय का यह है प्रगतिशील चेहरा</title>
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	<description>बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>By: ranjan</title>
		<link>http://jantantra.com/2010/01/28/reality-of-vibhuti-narain-rai/comment-page-1/#comment-1736</link>
		<dc:creator>ranjan</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Feb 2010 07:38:25 +0000</pubDate>
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		<description>parashar pandit, (agar tumhara kul-gotra &quot;nirdosh&quot; hai to)

tumhari yah tahkikaat beshak achchi lagi.

shayad tumne darbhangia panditon ke chauraath ke doolha bazar ka me kisi vyakti ki khaandaani panjika banane ya uska itihaas sanjo ke rakhne ka dhandha karte ho.

isi tarah tumhein vn rai ke kul-gotra ka bhi byora dena chahiye. wahaan se tumhein jitna mila hoga, us se bhi achchi keemat milegi. suna hai, wahaan keemat ke roop &quot;bhinn-bhinn&quot; &quot;sewaayein&quot; pradaan ki jati hain. agr zameer bachaa hua ho &quot;sewaa&quot; lene se pahle &quot;sewaa&quot; pradaata ke kul-gotra ki parakh zaroor kar lena, kyonki kaheen wah tumhaara hissa na nikle ya kaheen us se tumhara kul-gotra na bhang ho jaye.

anil chamadiya ke dalit paksh ko itna hi samajh sakne ki tumhaari aukaat hai.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>parashar pandit, (agar tumhara kul-gotra &#8220;nirdosh&#8221; hai to)</p>
<p>tumhari yah tahkikaat beshak achchi lagi.</p>
<p>shayad tumne darbhangia panditon ke chauraath ke doolha bazar ka me kisi vyakti ki khaandaani panjika banane ya uska itihaas sanjo ke rakhne ka dhandha karte ho.</p>
<p>isi tarah tumhein vn rai ke kul-gotra ka bhi byora dena chahiye. wahaan se tumhein jitna mila hoga, us se bhi achchi keemat milegi. suna hai, wahaan keemat ke roop &#8220;bhinn-bhinn&#8221; &#8220;sewaayein&#8221; pradaan ki jati hain. agr zameer bachaa hua ho &#8220;sewaa&#8221; lene se pahle &#8220;sewaa&#8221; pradaata ke kul-gotra ki parakh zaroor kar lena, kyonki kaheen wah tumhaara hissa na nikle ya kaheen us se tumhara kul-gotra na bhang ho jaye.</p>
<p>anil chamadiya ke dalit paksh ko itna hi samajh sakne ki tumhaari aukaat hai.</p>
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		<title>By: Ramesh Parashar</title>
		<link>http://jantantra.com/2010/01/28/reality-of-vibhuti-narain-rai/comment-page-1/#comment-1735</link>
		<dc:creator>Ramesh Parashar</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Jan 2010 16:12:03 +0000</pubDate>
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		<description>अनिल चमड़िया का ये कहना कि वे दलित हैं, 100 फीसदी झूठ है। श्री चमड़िया पत्रकारिता में मौका पाने के लिए स्वयं को दलित कहते हैं। इनका तथाकथित दलित प्रेम भी एक स्वांग है क्योंकि अनिल जी और इनके परिवार को दलितों से कोई लेनादेना नहीं है। अनिल चमड़िया न जाति से और न कर्म से दलित हैं। बल्कि वे जाति से मारवाड़ी बनिया और बड़े व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इनकी शिक्षा सासाराम में ही हुई है। अत: हर व्यक्ति इनके बारे में अच्छी तरह जानता है। इनका विवाह सासाराम शहर के बड़े वैश्य परिवार गिरीश चन्द्र जायसवाल की बेटी से हुआ है। जिनका शहर में दर्जनों मकान, मार्केट और व्यापार है। अन्य भाइयों और बहन की शादियां भी बड़े मारवाड़ी व्यापारी परिवार में हुई है। इनके परिवार के किसी भी दूर के रिश्तेदार का भी वैवाहिक सम्बंध किसी दलित परिवार से नहीं है। अनिल चमड़िया और उनके परिवार का एक संक्षिप्त परिचय-
अनिल चमड़िया, पिता स्व. राम गोपाल चमड़िया, निवासी -हरे कृष्ण कॉलोनी, कंपनी सराय, थाना- सासाराम, जिला-रोहतास, बिहार, अपने पांच भाई और एक बहन में सबसे बड़े हैं। इनके अन्य भाइयों का नाम सुनील चमड़िया पेशे से चार्टर्ड एकाउटेंट, आलोक चमड़िया और अमित चमड़िया पेशे से पत्रकार और अशोक चमड़िया पारिवारिक गल्ले के व्यवसाय में हैं। बहन प्रीती चमड़िया का विवाह हो गया है। इनके परिवार का लगभग 30-35 वर्षों से गल्ला के थोक दलाली का व्यवसाय है, जिसे पूर्व में इनके पिता और अब भाई संचालित करते हैं। ये लोग मूलत: मध्य प्रदेश के सागर शहर के निवासी हैं। जो बाद में व्यवसाय हेतु सासाराम आ गए थे। इनका परिवार सासाराम शहर के बड़े व्यवसायी मारवाड़ी परिवारों में शुमार होता है। अनिल चमड़िया के चचेरे चाचा श्री मनोहर लाल जी अपने ननिहाल के धन पर सागर से सासाराम आए। यहां आकर इन्होने अपनी सरनेम चमड़िया की जगह पोद्दार लिखना शुरू कर दिया, क्योंकि इनके ननिहाल का उपनाम पोद्दार था। मनोहर लाल जी चूंकि अपने ननिहाल के घर पर आए तो इन्होंने अपना उपनाम पोद्दार रख लिया। परन्तु अनिल चमड़िया के पिता ने अपना मूल मारवाड़ी उपनाम चमड़िया बरकरार रखा। जो आज तक चला आ रहा है। श्री अनिल चमड़िया के दादा का नाम महावीर प्रसाद चमड़िया था, जो म.प्र. के सागर शहर में व्यवसाय करते थे। बाद में सासाराम आने से पहले इनके पिता और चाचा ने वहां की संपति बेच दी। आज श्री चमड़िया के परिवार के पास शहर और उसके आसपास करोड़ों का व्यवसाय पत्रकारिता के धौंस पर बखूबी चलता है। इनके और इनके भाइयों के पत्रकारिता की धौंस हमेशा इन लोगों के व्यवसायिक हितों के काम आई है।
चमड़िया के सरनेम वाले श्री सीताराम चमड़िया कांग्रेस के जमाने में बिहार सरकार के मन्त्री हुआ करते थे। जो मारवाड़ी बनिया थे। अनिल जी शायद देश के पहले स्वघोषित दलित हैं, जिन्होंने दलित जुमले का इस्तेमाल अपने पत्रकारिता के करियर को चमकाने में किया है। लेकिन श्री चमड़िया पहले शख्स होंगे, जो गैर दलित होते हुए दलित के नाम पर सहानुभूति लेते हैं। मैं पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ इनके तहसील का ही निवासी हूं। इसलिए इनसे जुड़ी हुई सारी जानकारी आप लोगों के सामने रख रहा हूं। इनके दलित होने और दलित प्रेम का खुलासा करना अभी बड़ा मौजूं था क्योंकि मैं भी बेसब्री से इस वक्त का इन्तजार कर रहा था। आशा है आपको यह तहकीकात अच्छी लगेगी।
रमेश पराशर</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनिल चमड़िया का ये कहना कि वे दलित हैं, 100 फीसदी झूठ है। श्री चमड़िया पत्रकारिता में मौका पाने के लिए स्वयं को दलित कहते हैं। इनका तथाकथित दलित प्रेम भी एक स्वांग है क्योंकि अनिल जी और इनके परिवार को दलितों से कोई लेनादेना नहीं है। अनिल चमड़िया न जाति से और न कर्म से दलित हैं। बल्कि वे जाति से मारवाड़ी बनिया और बड़े व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इनकी शिक्षा सासाराम में ही हुई है। अत: हर व्यक्ति इनके बारे में अच्छी तरह जानता है। इनका विवाह सासाराम शहर के बड़े वैश्य परिवार गिरीश चन्द्र जायसवाल की बेटी से हुआ है। जिनका शहर में दर्जनों मकान, मार्केट और व्यापार है। अन्य भाइयों और बहन की शादियां भी बड़े मारवाड़ी व्यापारी परिवार में हुई है। इनके परिवार के किसी भी दूर के रिश्तेदार का भी वैवाहिक सम्बंध किसी दलित परिवार से नहीं है। अनिल चमड़िया और उनके परिवार का एक संक्षिप्त परिचय-<br />
अनिल चमड़िया, पिता स्व. राम गोपाल चमड़िया, निवासी -हरे कृष्ण कॉलोनी, कंपनी सराय, थाना- सासाराम, जिला-रोहतास, बिहार, अपने पांच भाई और एक बहन में सबसे बड़े हैं। इनके अन्य भाइयों का नाम सुनील चमड़िया पेशे से चार्टर्ड एकाउटेंट, आलोक चमड़िया और अमित चमड़िया पेशे से पत्रकार और अशोक चमड़िया पारिवारिक गल्ले के व्यवसाय में हैं। बहन प्रीती चमड़िया का विवाह हो गया है। इनके परिवार का लगभग 30-35 वर्षों से गल्ला के थोक दलाली का व्यवसाय है, जिसे पूर्व में इनके पिता और अब भाई संचालित करते हैं। ये लोग मूलत: मध्य प्रदेश के सागर शहर के निवासी हैं। जो बाद में व्यवसाय हेतु सासाराम आ गए थे। इनका परिवार सासाराम शहर के बड़े व्यवसायी मारवाड़ी परिवारों में शुमार होता है। अनिल चमड़िया के चचेरे चाचा श्री मनोहर लाल जी अपने ननिहाल के धन पर सागर से सासाराम आए। यहां आकर इन्होने अपनी सरनेम चमड़िया की जगह पोद्दार लिखना शुरू कर दिया, क्योंकि इनके ननिहाल का उपनाम पोद्दार था। मनोहर लाल जी चूंकि अपने ननिहाल के घर पर आए तो इन्होंने अपना उपनाम पोद्दार रख लिया। परन्तु अनिल चमड़िया के पिता ने अपना मूल मारवाड़ी उपनाम चमड़िया बरकरार रखा। जो आज तक चला आ रहा है। श्री अनिल चमड़िया के दादा का नाम महावीर प्रसाद चमड़िया था, जो म.प्र. के सागर शहर में व्यवसाय करते थे। बाद में सासाराम आने से पहले इनके पिता और चाचा ने वहां की संपति बेच दी। आज श्री चमड़िया के परिवार के पास शहर और उसके आसपास करोड़ों का व्यवसाय पत्रकारिता के धौंस पर बखूबी चलता है। इनके और इनके भाइयों के पत्रकारिता की धौंस हमेशा इन लोगों के व्यवसायिक हितों के काम आई है।<br />
चमड़िया के सरनेम वाले श्री सीताराम चमड़िया कांग्रेस के जमाने में बिहार सरकार के मन्त्री हुआ करते थे। जो मारवाड़ी बनिया थे। अनिल जी शायद देश के पहले स्वघोषित दलित हैं, जिन्होंने दलित जुमले का इस्तेमाल अपने पत्रकारिता के करियर को चमकाने में किया है। लेकिन श्री चमड़िया पहले शख्स होंगे, जो गैर दलित होते हुए दलित के नाम पर सहानुभूति लेते हैं। मैं पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ इनके तहसील का ही निवासी हूं। इसलिए इनसे जुड़ी हुई सारी जानकारी आप लोगों के सामने रख रहा हूं। इनके दलित होने और दलित प्रेम का खुलासा करना अभी बड़ा मौजूं था क्योंकि मैं भी बेसब्री से इस वक्त का इन्तजार कर रहा था। आशा है आपको यह तहकीकात अच्छी लगेगी।<br />
रमेश पराशर</p>
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		<title>By: सुशांत झा</title>
		<link>http://jantantra.com/2010/01/28/reality-of-vibhuti-narain-rai/comment-page-1/#comment-1734</link>
		<dc:creator>सुशांत झा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Jan 2010 14:57:21 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत बढ़िया, कृष्ण कुमार जी, जारी रहिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत बढ़िया, कृष्ण कुमार जी, जारी रहिए।</p>
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		<title>By: aam admi</title>
		<link>http://jantantra.com/2010/01/28/reality-of-vibhuti-narain-rai/comment-page-1/#comment-1733</link>
		<dc:creator>aam admi</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Jan 2010 10:56:50 +0000</pubDate>
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		<description>सामंती चरित्र और प्रतिक्रियावादी मानसिकता में पगा आदमी अपने हितों को साधने के लिए सबसे पहले प्रगतिशीलता का ही लबादा ओढ़ता है.  विभिन्न स्रोतों से वर्धा से आ रही ख़बरों से यह साबित होता है कि महात्मा गाँधी के नाम पर बने विश्वविद्यालय को सामंती चरित्र और प्रतिक्रियावादी मानसिकता में पगे लेकिन प्रगतिशीलता का लबादा  ओढ़े  एक कुलपति ने अपनी निजी मिल्कियत मान लिया है.  इतिहास गवाह है कि जब भी किसी व्यवस्था/ निकाय / संस्थान का  नेतृत्व किसी &#039;रंगे सियार&#039; के हांथो में आया है, उसका बंटाधार ही हुआ है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सामंती चरित्र और प्रतिक्रियावादी मानसिकता में पगा आदमी अपने हितों को साधने के लिए सबसे पहले प्रगतिशीलता का ही लबादा ओढ़ता है.  विभिन्न स्रोतों से वर्धा से आ रही ख़बरों से यह साबित होता है कि महात्मा गाँधी के नाम पर बने विश्वविद्यालय को सामंती चरित्र और प्रतिक्रियावादी मानसिकता में पगे लेकिन प्रगतिशीलता का लबादा  ओढ़े  एक कुलपति ने अपनी निजी मिल्कियत मान लिया है.  इतिहास गवाह है कि जब भी किसी व्यवस्था/ निकाय / संस्थान का  नेतृत्व किसी &#8216;रंगे सियार&#8217; के हांथो में आया है, उसका बंटाधार ही हुआ है.</p>
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