गुरुवार को दिल्ली ने हिंदी पत्रकारिता के युगपुरुष प्रभाष जोशी को एक बार फिर दिल से याद किया। मौका था प्रभाष जोशी पर लिखे गए किताब हद से अनहद गए के लोकार्पण का और जगह थी गांधी शांति प्रतिष्ठान का सभागार। इस किताब का लोकार्पण कुलदीप नैय्यर ने किया जबकि समारोह की अध्यक्षता की जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने। इस मौके पर नित्यानंद तिवारी, मंगलेश डबराल, अशोक वाजपेयी, अनुपम मिश्र, पुण्य प्रसून वाजपेयी, पुष्पराज और प्रभाष जोशी के बेटे सोपान जोशी ने प्रभाष जोशी के बारे में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन किया रवीन्द्र त्रिपाठी ने।
इस किताब का संपादन किया है मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, रेखा अवस्थी और युवा पत्रकार स्मित पराग ने। मुरली मनोहर सिंह, जनवादी लेखक संघ के महासचिव हैं और रेखा अवस्थी दयाल सिंह कॉलेज में हिंदी की प्रध्यापिका। स्मित पराग युवा पत्रकार हैं और अमर उजाला में काम करते हैं। इस किताब के संपदक मंडल के तीनों सदस्य वामपंथी रुझान के हैं और संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी वामपंथी संपादक मंडल ने एक गैर-वामपंथी पत्रकार पर किताब संपादित की है।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने कहा कि उन्होंने प्रभास जोशी के साथ लंबे वक्त तक काम किया और आपातकाल के दौर में प्रभाष जोशी के किए काम को दुनिया याद रखेगी। उस आन्दोलन के खिलाफ एक्सप्रेस समूह का बड़ा रोल था और निसंदेह उसमें प्रभाष जोशी का बड़ा योगदान था। नैय्यर ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय प्रभाष जोशी ने पत्रकारिता की जो मिसाल कायम की वो अपने आप में नायाब हैं। उन्होंने ये मानने से इंकार कर दिया कि एक समुदाय विशेष को आतंकवादी कहा जाए। कुलदीप नैय्यर ने कहा कि प्रभाष जोशी जैसे घनघोर पढ़ने वाले पत्रकार बिरले ही होते हैं, उनका अध्ययन संसार विशाल था। अपने आपको जिंदगी की आखिरी वेला में खड़ा बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी खास कुछ नहीं कर पाई। ये नई पीढ़ी का कर्तव्य है कि वो प्रभाष जोशी के जलाए अलख को कायम रखे और समाज में भाईचारा बनाने की दिशा में काम करे।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने प्रभाषजी को याद करते हुए कहा कि वो उन गिने चुने पत्रकारों में थे जिनकी आवाज साहित्य जगत तक में साफ सुनी जाती थी। उन्होंने राम मनोहर लोहिया और राजेंद्र माथुर के साथ प्रभाष जोशी की तुलना करते हुए कहा कि ये वो लोग थे जिन्होंने हिंदी की नई शैली विकिसत की और हिंदी वालों को उनका उचित सम्मान दिलाने में पूरी कोशिश की। उन्होंने ये भी कहा कि प्रभाष जोशी जैसा पत्रकार पैदा नहीं हुआ जो हिंदीभाषी समाज का प्रवक्ता बन गया हो। अशोक वाजपेयी ने कहा कि प्रभाष जोशी गांधीवादी निर्भयता के आखिरी प्रवक्ता थे।
टेलीविजन पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने प्रभाष जोशी को याद करते हुए कहा कि वो अपनी मृत्यु से पहले भी पत्रकारीय नैतिकता को स्थापित करने के जेहाद में लगे रहे। उन्होंने उनके द्वारा पैकेज पत्रकारिता के खिलाफ उठाई गई आवाज को याद किया और पत्रकारिता के अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा की।
समारोह में प्रभाष जोशी के बेटे सोपान जोशी ने भी अपने पिता को याद करते हुए विचार रखा। संदीप ने कहा कि उनके पिता पत्रकारिता करने तो निकले ही नहीं थे, वे तो लोकसेवा करने निकले थे। फिर पता नहीं कैसे उन्होंने लोकसेवा करते हुए इस पेशे में 52 बरस काट दिए पता ही नहीं चला। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का अपना अलग-२ नेटवर्क होता है, किसी का राजनैतिक किसी का आर्थिक। जबकि प्रभाष जोशी का नेटवर्क लोक नेटवर्क था जिसने उन्हें प्रभाष जोशी बनाया।
वरिष्ठ पर्यावरणविद और गांधीमार्ग के संपादक अनुपम मिश्र ने प्रभाष जोशी को याद करते हुए कहा कि हमें प्रभाष जोशी द्वारा शुरु किए गए कामों को याद करने तक ही नहीं रुकना चाहिए, बल्कि उसे आगे भी बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम प्रण करें कि हम दिन में कुछ अच्छा काम जरुर करेंगे और अच्छा जरुर लिखेंगे। यही प्रभाष जोशी को याद किए जाने की सबसे बड़ी वजह होगी।
जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्रभाष जोशी ने जो पत्रकारीय स्वतंत्रता की मिसाल जनसत्ता में कायम की उसे वे भरसक आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाषजी जैसा निर्भीक पत्रकार बहुत कम पैदा होता है, जनसत्ता उनके द्वारा तय किए मापदंडों को आगे बढ़ाने को तैयार है और इसे एक जिम्मेदारी के रुप में ले रहा है। उन्होंने बताया कि उनके समेत एक पूरी पीढ़ी को सहिष्णुता और निडरता प्रभाष जोशी ने सिखाई है। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल और युवा पत्रकार पुष्पराज ने भी अपने विचार रखे।
Bihar Working Journalists Union Patna
January 29, 2010 at 5:41 pm
Bhai Varishth Hindi kavi Manglesh ewam NandigramDiary Ke charchit lekhak ewam yuva Hindi freelance journalist Pushpraj Ne Kya khata ki ki dono ko ish report mein ek line me hi nipta diya gaya hai.
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