अब सदी का महानायक गुजरात का चेहरा होगा। टूरिस्टों को गुजरात की ओर आकर्षित करने के लिए अमिताभ बच्चन अब मोदी के ब्रैंड अंबैसेडर होंगे। अमिताभ बच्चन ने नरेंद्र मोदी का निमंत्रण स्वीकार करते हुए उन्हें चिठ्ठी लिखका हामी भर दी है। अब गुजरात के दो चेहरे होंगे। नरेंद्र मोदी और अमिताभ बच्चन। दरअसल, ये डील तो उसी दिन पक्की हो गई थी जिस दिन अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म “पा” के प्रमोशन के लिए गुजरात पहुंचे और नरेन्द्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट के लिए फिल्म “पा” की स्पेशल स्क्रीनिंग की। उस दिन “पा” और गुजरात के हिंदुवादी “पा” मोदी की झप्पियां डालते हुए तस्वीर देखकर यूं लगा कि कुंभ के मेले में बिछड़े भाई सालों बाद मिले हों।
अपनी प्रोडक्ट की पब्लिसिटी करने का सबको हक़ है। खासकर तब जब फिल्म का प्रोड्यूसर अपना बेटा ही हो। लेकिन अमिताभ बच्चन नरेंद्र मोदी के आभा मंडल से इतनी जल्दी इतने प्रभावित हो जाएंगे, ये कयास लगाना मुश्किल था। फिल्म “पा” देखने के बाद दर्शक जितना ऑरो के किरदार से प्रभावित दिखता है ठीक वैसे ही अमिताभ बच्चन भी मोदी से मुलाकात के बाद एक्साइटेड दिखे।
अपने ब्लॉग पर उन्होंने नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की। इसलिए कि मोदी सरकार ने फिल्म को टैक्स फ्री करने की उनकी दर्ख्वास्त मान ली है। उसी ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने मोदी की शान में कसीदे पढ़े। आखिर मोदी ने उन्हें इतना अच्छा गिफ्ट जो दिया था। अपने ब्लॉग में अमिताभ बच्चन मोदी को पहुंचे हुए संत-महात्मा कहते-कहते रह गए। कहा कि बावजूद इसके कि नरेंद्र मोदी इतने बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं, उनका रहन-सहन का बहुत सादा है। वो ऐशो-आराम की ज़िंदगी नहीं बल्कि मूलभूत सुविधाओं के साथ भी खुश रहते हैं। बच्चन साहब आगे लिखते हैं कि मोदी नए विचारों के कायल हैं और जो कहते हैं वो करते हैं। अब मोदी जी क्या कहते हैं और क्या करते हैं ये जानने के लिए किसी को अमिताभ बच्चन के इन्ट्रोडक्शन की जरूरत तो नहीं। सन 2002 में जिसने भी नरोदा पाटिया, गुलबर्गा, सरदारपुरा का नाम सुना और न्यूज़ चैनलों पर वहां की तस्वीरें देखीं वो आज तक उन्हें भूला नहीं सके होंगे।
मोदी ने अमिताभ बच्चन की बात मान ली, पर लगे हाथ अपना काम भी निकाल लिया। गुजरात में पर्यटन को प्रमोट करने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन को ब्रैंड अम्बैसेडर साइन कर लिया। अमिताभ बच्चन अब कृष्ण की नगरी द्वारिका और ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर और तमाम ऐसी हेरीटेज साइट्स के लिए गुजरात सरकार की प्रमोशनल फिल्म के लिए आवाज देंगे। लोगों को गुजरात की तरफ खींचने में वो मोदी के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे। जाहिर है इस प्रमोशनल फिल्म में नरोदा पटिया और गुलबर्गा के ताज़ा इतिहास के कुछ पन्ने गायब कर दिए जाएंगे।
इस मौके पर मोदी ने अमिताभ बच्चन को महानायक कह कर संबोधित किया। फिल्म “पा” में उनकी एक्टिंग की जमकर तारीफ की। अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग पर लिखा कि मोदी के मुंह से तारीफ सुनकर वो इतना झेंप गए कि उन्हें समझ में नहीं आया कि टेबल के नीचे या कहां छुपें। मोदी से मुलाकात के बाद अमिताभ बच्चन खुद को धन्य मान रहे हैं और मोदी का भी काम बन गया। पिछले साल देश के बड़े-बड़े उद्योगपति उनको विकास का सबसे बड़ा पैरोकार घोषित कर गए। रही-सही कसर अमिताब बच्चन ने पूरी कर दी। अब मोदी खुद को किसी भी प्रकार के अपराधबोध से मुक्त मान रहे होंगे।
वैसे बच्चन परिवार के राजनीतिक घरानों से हमेशा अच्छे ताल्लुकात रहे। खुद अमिताब बच्चन भी मुंबई की गैर-संवैधानिक ‘सरकार’ बाल ठाकरे के कायल रहे। उनकी शान के खिलाफ कुछ नहीं बोलते। चाहे वो मुंबई मराठियों के लिए जैसा हिटलरशाही फरमान जारी करें। मगर बच्चन साहब के लिए ठाकरे हमेशा वंदनीय हैं। अब इसके पीछे की मंशा भी कभी किसी से छुपी नहीं रही। भाई-समान दोस्त अमर सिंह मिल गए तो समाजवादी कुनबे में बच्चन परिवार का भी स्वागत हुआ। उसी पार्टी से उनकी पत्नी जया बच्चन राज्य सभा की सांसद बनीं और अमिताभ खुद उस पार्टी के अन-ऑफिशियल अम्बैसेडर। लेकिन जब दोस्त-समान भाई ही उस पार्टी में नहीं रहे तो उस पार्टी से कैसे संबंध। फिर जहां अमर सिंह जाएंगे, वहां ये भी सट लेंगे। तब तक मोदी से काम चला लेंगे। तो क्या अमिताभ का गुजरात दौरा अमर सिंह के इशारे पर ही हुआ। इसका जवाब अब अमर सिंह को भी देना होगा।
ये भी हो सकता है कि बीजेपी अध्यक्ष गडकरी की तरह अमिताभ बच्चन भी मोदी और महात्मा गांधी को एक ही तराज़ू में तौलते हों। अमिताभ को भी यही लगता हो कि महात्मा गांधी ने जो देश के लिए आहुति दी वैसी ही आहुति मोदी गुजरात के “विकास यज्ञ” में दे रहे हैं। ये अलग बात है कि मोदी के ‘वाइब्रेन्ट’ गुजरात के इस’यज्ञ’ में जिसकी बलि दी गई – उसी सामाजिक समरसता, साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारा को बनाए रखने के लिए महात्मा गांधी शहीद हुए।
मोदी के साथ बिताए आखिरी पल को समेटते हुए अमिताभ बच्चन उन्हें पिता हरिवंश राय बच्चन की काव्य गाथा “मधुशाला” की प्रति भेट करना नहीं भूले। मधुशाला की वो पंक्ति याद आती है जिसे खुद हरिवंश राय बच्चन भी गुनगुना चुके हैं।
मुसलमान और हिंदू हैं दो, एक मगर उनका प्याला
एक मगर उनका मदिरालय, एक मगर उनकी हाला
दोनों रहते साथ, न जब तक मंदिर मस्जिद को जाते
बैर बढ़ाते मंदिर-मस्जिद, मेल कराती मधुशाला..
लेकिन मोदी जी को ऐसी कविता नहीं पसंद आएगी, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों का नाम एक साथ लिया जाए। उनके सामने मदिरा की बात करना तो बड़ा अपराध है। गुजरात “ड्राई स्टेट” जो है।
कुछ दिनों में आपके ड्राइंग रूम में रखे टीवी सेट्स पर सदी के महानायक की आवाज़ फिर गूंजेगी। मैं नरेन्द्र मोदी की तपोभूमि गुजरात से अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं। आप सभी से निवेदन है कि आप भारी से भारी संख्या में यहां पधारें। यहां पहुंचने वाले हर सैलानी को ‘नमो-च्चन’ ( यानी नरेन्द्र मोदी और अमिताभ बच्चन ) द्वारा ऑटोग्राफ्ड भगवा चश्मा गिफ़्ट किया जाएगा।

प्रभात शुंगलू
((वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू IBN 7 में एडिटर (स्पेशल असाइनमेंट) हैं))
अनुनाद सिंह
February 6, 2010 at 5:28 pm
अच्छे काम की तारीफ का सबको हक है। मोदी ने सुशासन और विकास का रास्ता दिखाया है। वे ‘लाल झंडी’ वालों की तरह केवल सैद्धान्तिक बकवासबाजी नहीं करते। उनका कार्य सबके आंखों के सामने है।