कुछ समय पहले की बात है। संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार के पास एक भी केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए पैसे नहीं हैं। उनके इस बयान में यह बात छिपी थी कि शिक्षा पर देश का बजट बहुत ही कम है और उतने में कोई क्रांतिकारी बदलावों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
अब हम आपके सामने इसी तस्वीर का एक दूसरा पहलू पेश करने जा रहे हैं। महात्मा गांधी हिंदी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुछ आंकड़े प्रस्तुत करने जा रहे हैं जो आपको चौंका सकते हैं। यहां हर एक छात्र पर करीब-करीब एक कर्मचारी तैनात है। आप इस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों पर गौर कीजिए और सोचिए कि जिस देश के पास एक भी केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने के पैसे नहीं हों, उस देश में शिक्षा के नाम पर इस फिजूलखर्ची को क्या कहना चाहिए?
- विश्वविद्यालय में कुल 4 विद्यापीठ हैं, जिसमें वर्तमान समय में 10 विभाग तथा 3 विशेष अध्ययन केंद्र हैं। विशेष अध्ययन केंद्रों में एक अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है। लिहाजा आप कह सकते हैं कि यहां फिलहाल कुल 12 विभाग हैं।
- इन 12 अध्ययन केंद्रों (विभागों) में तीन तरह के पूर्णकालिक पाठ्यक्रम, एम.ए, एम.फ़िल तथा पी.एच.डी. संचालित हो रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों का संचालन विश्वविद्यालय की केंद्रीय अकादमिक गतिविधि है।
- एम.ए स्तर पर हर विभाग में प्रवेश के लिए कुल 28 सीटें हैं। इस लिहाज से एम.ए. सत्र 2009-11 के लिए सभी विभागों को मिलाकर कुल 336 सीटें उपलब्ध थीं।
- मगर एम.ए के लिए उपलब्ध 336 सीटों में मात्र 76 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
- विभागों के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्तमान सत्र में एम.ए स्तर पर प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या इस तरह है:-
- सत्र 2009 में एम.फ़िल पाठ्यक्रम कुल सात विभागों में संचालित हो रहा है। इस सत्र में एक विभाग में उपलब्ध सीटों की संख्या 14 थी। अतः कुल उपलब्ध 98 सीटों पर 71 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
- अब आप सभी विभागों, केंद्रों के उपरोक्त सभी नियमित पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्र-छात्राओं की कुल संख्या पर नज़र डालिए। यह संख्या 1200 से ऊपर होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में यह संख्या मात्र 327 (तीन सौ सत्ताइस) है।
- विद्यापीठ के अनुसार सभी नियमित पाठ्यक्रमों को मिलाकर वर्तमान में कुल छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों की संख्या (एम.ए, एम.फ़िल तथा पीएच.डी सहित) इस तरह है;
छात्रों के बाद अब शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या का ब्योरा पढ़िए।
अगर उपरोक्त आंकड़ों को जोड़ा जाए तो नियमित और अस्थाई अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या 285 (3+42+4+8+78+150) है। यहां ध्यान रखिए की अस्थाई शिक्षकों और कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या को जोड़ा गया है। अगर हम अधिकतम संख्या जोड़ें तो यह आंकड़ा 335 (3+42+4+8+78+200) होता है। यह संख्या छात्रों की कुल संख्या से कहीं अधिक है।
SHAMBHUKSINGH
February 23, 2010 at 7:33 am
लूट की अनोखी मिशाल… आंकड़े के लिए धन्यवाद, शायद सिब्बल भी जनतंत्र के पाठक होते… नहीं तो खुद ही बताइये न उनको जाकर मॉडरेटर सर, इस देश पर आपका एहसान होगा… नहीं तो इतिहास रटकर फसल काटने वाले लोग लूटते रहेंगे…