ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव कौंसिल से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक मृणाल पांडे ने इस्तीफ़े का आधिकारिक आधार अपनी व्यस्तताओं को बनाया है। वो हाल ही में प्रसार भारती की चेयरमैन चुनी गईं हैं। लेकिन सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मृणाल पांडे अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवादों की वजह से नाखुश थीं।
हाल के दिनों में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय को लेकर एक के बाद एक कई विवाद उभरे हैं। वहां के कुलपति विभूति नारायण राय पर दलित उत्पीड़न और जातिवादी ज़हर फैलाने का आरोप लगा है। साथ ही प्रोफेसर अनिल चमड़िया को अनैतिक तरीके से निकालने का भी आरोप है। कुछ ख़बरें तो और भी चौंकाने वाली हैं। 327 छात्रों वाले इस विश्वविद्यालय में सम्मेलनों के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है।
कुछ दिन पहले इस बारे में जब मृणाल पांडे से कुछ छात्रों ने सवाल किया था। तब उन्होंने छात्रों को बताया कि एक्जीक्यूटिव कौंसिल में विभूति नारायण राय ने कहा था कि अनिल चमड़िया की नियुक्ति में विश्वविद्यालय से एक ग़लती हो गई है। नियमों के आधार पर यह नियुक्ति सही नहीं है। विभूति ने यह भी कहा था कि अदालत में यूनिवर्सिटी ने अपनी ग़लती मान ली है। यही वजह है कि एक्जीक्यूटिव कौंसिल ने अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त की और इस फैसले में वो भी शामिल रहीं। जिसके बाद छात्रों ने उनके सामने सारी तस्वीर पेश की तो मृणाल पांडे ने कहा कि अगर ऐसा है तो वो एक्जीक्यूटिव कौंसिल से इस्तीफ़ा दे देंगी। सूत्रों के मुताबिक अब उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है और राष्ट्रपति को चिट्ठी भेज दी है।
विजय प्रताप
February 24, 2010 at 1:13 pm
इस्तीफा स्वागत योग्य है. इसे और पहले ही आ जाना चाहिए था.