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कश्‍मीर एक खूबसूरत जेल है

कश्‍मीर एक खूबसूरत कारागार है। यही वह वाक्‍य है जिसने एक फिल्‍म के निर्माण की प्रेरणा दी।

जब फिल्मकार राहुल ढोलकिया ने कश्मीरी छात्रों से मुलाकात की तो एक छात्र ने कश्मीर को ‘खूबसूरत कारागार’ कहा। छात्र की यह बात ढोलकिया को इतना छू गई कि उन्होंने ‘लम्हा’ बनाने का निर्णय लिया। सोलह जुलाई को प्रदर्शित होने जा रही यह फिल्म अपने कुछ संवादों के चलते सेंसर की उलझनों में फंसी हुई है।

ढोलकिया को उनकी फिल्म ‘परजानिया’ (2005) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। वह कहते हैं कि उन्होंने कुछ कश्मीरी छात्रों से मुलाकात के बाद ‘लम्हा’ बनाने का निर्णय लिया।

ढोलकिया ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, “घाटी पर फिल्म बनाने का निर्णय लेने के पीछे वजह यह है कि ‘परजानिया’ के प्रदर्शन के दौरान मैंने कुछ कश्मीरी छात्रों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर एक खूबसूरत जेल है। यह कुछ ऐसी बात थी जिसने मेरा ध्यान खींच लिया।”

घाटी में रहने वाले कश्मीरियों के जीवन पर बनी ‘लम्हा’ कई बार सेंसर की उलझनों में फंस चुकी है। ढोलकिया कहते हैं कि वह सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली से बहुत नाराज हैं।

शुरुआत में यह कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के प्रोमो को अस्वीकृत कर दिया और फिल्मकार को पुनरीक्षण समिति से पास जाना पड़ा।

इसके बाद फिल्म के कुछ संवादों जैसे ‘दुनिया की सबसे खतरनाक जगह कश्मीर’ के ‘सबसे’ और ‘फर्जी इलेक्शंस’ के ‘फर्जी’ शब्द पर आपत्ति जताई गई और इन शब्दों को हटाने के लिए कहा गया।

गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि के खिलाफ ‘परजानिया’ बना चुके ढोलकिया कहते हैं कि जब आप संवेदनशील फिल्में बनाते हैं तो आपको परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ता है।

लम्हा’ में बिपाश बसु, संजय दत्त, कुणाल कपूर और अनुपम खेर जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

ढोलकिया ‘लम्हा’ के अलावा डिम्पल कपाड़िया, ओम पुरी, सीमा बिस्वास और परेश रावल के साथ ‘सोसायटी’ फिल्म पर काम कर रहे हैं। (आईएएनएस)

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