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विभूति-कालिया के बचाव का भाषासेतु

रवींद्र कालिया चुप हैं। विभूति नारायण राय भी अब संभल कर बोल रहे हैं। पहले घूम-घूम कर छिनाल का मतलब छिन्न-नाल समझा रहे थे। यानी जो जड़ों से कट गया हो। परंपरा से अलग हो गया हो। लेकिन अब वो भी नहीं कह रहे। ग़लती मानने के बाद यही समझा रहे हैं कि इंटरव्यू लेने वाले ने ही सारी गड़बड़ कर दी। वरना वो महिलाओं को छिनाल कहेंगे? इतने संवेदनहीन नहीं हैं? मतलब रवींद्र कालिया और हंटर साहब, दोनों थोड़ा संभल गए हैं। और संभल गए हैं तो अपने बचाव में कुछ नया खेल जरूर करेंगे। शायद इसलिए उन्होंने अपने चेलों को आगे कर दिया है।

कुणाल सिंह और सुशील । उन दोनों ने अपने ब्लॉग भाषासेतु पर एक ऐसे सेतु का निर्माण शुरू किया है जिस पर सवार होकर कालिया-विभूति की जोड़ी मौजूदा भंवर से बाहर निकल जाए और वैतरणी पार कर जाए। इसी क्रम में उन्होंने एक अनोखा हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। वो यह कि आखिर विरोध की भाषा कैसी होनी चाहिए? विभूति-कालिया के विरुद्ध विरोध की भाषा काफी मैली है। इसलिए वो उस भाषा का विरोध करते हैं।  परोक्षरुप से देखा जाए तो विभूति नारायण राय और रवींद्र कालिया का समर्थन करते हैं।

अब आप यह भी जानना चाहते होंगे कि आखिर इस हस्ताक्षर अभियान में कौन-कौन शामिल हैं? अगर ब्लॉग में दी गई सूची पर यकीन करें तो विभूति-कालिया के बचाव में चलाई जा रही इस मुहिम में महाश्वेता देवी ने भी हस्ताक्षर किए हैं। जबकि कुछ दिन पहले उन्होंने विभूति को बर्खास्त करने की मांग की थी। हम ब्लॉग पर दी हुई भूमिका और पूरी सूची यहां छाप रहे हैं। आप उन सभी पर नज़र डालें और अपनी प्रतिक्रिया दें।

पिछले दिनों, हिंदी पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’ में प्रकाशित एक साक्षात्कार के प्रसंग में असहमतियों के बिन्दुओं पर सैद्धांतिक विचार विमर्श की बजाय व्यक्तिगत विद्वेष और अतिचार अमर्ष की अभिव्यक्ति साहित्यिक बहस की मर्यादा का उल्लंघन कर रही है। साक्षात्कार में उपयुक्त आपत्तिजनक शब्दों की हम भर्त्सना करते हैं, फिर भी संपादक और लेखक द्वारा खेद प्रकट करने के बावजूद कुछ रचनाकारों द्वारा एक संचार पत्र समूह विशेष में लगातार गरिमाहीन आक्रमण से हम सभी रचनाकार क्षुब्ध अनुभव कर रहे हैं और अपनी असहमति व्यक्त कर रहे हैं।

हस्ताक्षर

महाश्वेता देवी
अमरकांत
रामदरस मिश्र
शहरयार
काजी अब्दुसत्तार
महीप सिंह
पद्मा सचदेव
नबारून भट्टाचार्य
चित्रा मुद्गल
मृदुला गर्ग
ममता कालिया
कन्हैयालाल नंदन
राजी सेठ
अखिलेश
आलोकधन्वा
अजय तिवारी
मधु कांकरिया
द्रोणवीर कोहली
अ अरविंदाक्षण
दिनेश कुमार शुक्ल
कुणाल सिंह
यू के एस चौहान
उपेन्द्र कुमार
गंगा प्रसाद विमल
सतीश जमाली
कृष्णा अग्निहोत्री
प्रियदर्शन मालवीय
सौमित्र
से रा यात्री
मधुर कपिला
शम्भू गुप्त
विनोदिनी गोयनका
बुद्धिसेन शर्मा
मनोरमा विस्वाल महापात्र
मनोरमा दीवान
मीरा सीकरी
यश मालवीय
बलदेव बंशी
अशोक त्रिपाठी
मनोज कुमार पाण्डेय
राजेंद्र राजन
बलराम
ज्ञान प्रकाश विवेक
पंकज सुबीर
राकेश मिश्र
अशोक मिश्र
एहतराम इस्लाम
संजय कुंदन
भारत भारद्वाज
सुशील सिद्धार्थ
प्रदीप सौरभ
प्रांजल धर
गजाल जैगम
कुमार अनुपम
वाजदा खान
फूल चन्द मानव
राजेंद्र राव
वंदना मिश्र
साधना अग्रवाल
दयानंद पाण्डेय
बोधिसत्व
बद्रीनारायण
नीरजा माधव
सूरज पालीवाल
नरेन्द्र मोहन
विमल चन्द्र पाण्डेय
गौरव सोलंकी
श्रीकांत दुबे
मीनाक्षी जोशी
विजेंद्र नारायण सिंह
केशुभाई देसाई
मेवाराम
दीपक शर्मा
उषाकिरण खान
कृष्ण कुमार सिंह
नीलम शंकर

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3 Responses to विभूति-कालिया के बचाव का भाषासेतु

  1. ajay Yadav Reply

    August 9, 2010 at 12:45 pm

    अजय तिवारी, आलोक धन्वा, राकेश मिश्र, कुणाल सिंह…

    आप लोग कर गये हैं लीड, लेकिन आप सब की लीद यहां मौजूद है

  2. मुझे लगता है कि ये सुशील कोई और हैं…सिद्धार्थ नहीं…। कृपया चेक करें।

    • समरेंद्र Reply

      August 10, 2010 at 9:43 am

      चंडीदत्त जी, पता लगा रहे हैं और आपकी टिप्पणी के बाद फिलहाल हमने उनके नाम के आगे से सिद्धार्थ हटा दिया है।

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