जनतंत्र, मोहल्ला लाइव औऱ यात्रा के सौजन्य से आयोजित बहसतलब पांच मे शिरकत कर रहे वक्ताओं से जनतंत्र.कॉम ने इस पहल और इसके अन्य पहलुओं पर बात की ।
पिंजर के लेखक और थियेटर कर्मी चंद्रप्रकाश द्विवेदी से इस आयोजन के बारे में उनका अनुभव पूछने पर कहा इस अनूठे आयोजन के लिए जिम्मेदार सारे आयोजकों को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं। ऐसे आयोजन बगैर इच्छाशक्ति के आप नहीं करा सकते।यह जरूरी नहीं की हर बहस का कोई हल निकले।सार्थक बहस हो यही बहुत है।रास्ता यही से निकलेगा।दर्शकों से खुला संवाद मजेदार रहा।
लेखक अतुल तिवारी ने कहा कि आज के बच्चे भाग्यशाली हैं कि उन्हे अभी से कुछ ऐसे लोगों से काफी करीब से रूबरू होने का मौका मिल रहा है जिन्होंने सिनेमा की दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल किया है।अनुराग कश्यप, सिनेमा में दिलचस्पी रखने वालों के लिए प्ररणास्त्रोत साबित होंगे।
वहीं पीपली लाइव से सुर्खियां बटोरने वाली अनुषा रिजवी ने कहा कि ऐसे आयोजन का स्वागत किया जाना चाहिए।मुझे खुशी है इसका हिस्सा बनने का मौका मिला ।जहां दर्शकों के साथ इतना खुला संवाद हों वहां आपको फीड बैक भी सही मिलता है।लोग आपके काम को पसंद करते हैं या नहीं। आपने कहां गलतियां की इसको जानने का इससे बेहतर जगह नहीं हो सकती।मैं आयोजको को शुभकामनायें देती हूं।और उम्मीद करती हूं बहसतलब का सिलसिला जारी रहेगा।
फिल्मकार अनुराग कश्यप से जब हमने यह पूछा कि सबसे ज्याद सवाल आपसे पूछे गये और कई बार आपने दूसरों के सवालो का भी जवाब दिया ,यह अनुभव कैसा रहा?
अनुराग ने हंसते हुए कहा कि हां मैने दूसरों का बाउंसर कई बार अपने उपर ले लिया ।लेकिन मजा आया,बहुत मजा आया। आयोजक मेरे मित्र हैं मैं उनकी कोशिश को सलाम करता हूं।ऐसे प्रयास होते रहना चाहिए।
उन्होंने कुछ शिकायती लहजे में कहा कि आज के युवा मेहनत कम और सफलता जल्दी चाहते है जो कि संभव नहीं है।मेरे पास कई ऐसे युवा आये जिनकी दिलचस्पी सिनेमा में है लेकिन वे पहले पायदान के बारे में नहीं आखिरी पायदान के बारे में पूछ रहें हैं।मैने उनसे कहा कि स्टेप दर स्टेप बढिये ।ज्यादा तेज दोड़ने पर जल्दी थक जायेंगे।सिनेमा प्रतिभा के साथ धैर्य भी मांगता है।हार मत मानों ।लक्ष्य बड़ा होगा तो रिस्क भी ज्यादा होगा। लेकिन बच्चे जोशीले हैं कुछ करेंगे जरूर (पीठ थपथपाते हुए )।
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