दुनिया की बीस सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी-20 की बैठक में शनिवार को वैश्विक आर्थिक असंतुलन से निपटने के उपायों को लेकर देशों के बीच मतभेद सामने आए। बैठक के दौरान वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि इस असंतुलन में हमारा कोई योगदान नहीं है, इसलिए इसके समाधान के लिए सभी को एक डंडे से हांकने वाला समझौता हमें कतई स्वीकार नहीं है।
बताया जा रहा है कि चीन ने भी इस मामले में कुछ कड़ा रुख अपना रखा है। चीन के पास इस समय 3,000 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और उसके चालू खाते में बचत का स्तर भी बहुत ऊंचा है। वह विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते में बचत को असंतुलन का सूचक बनाए जाने के खिलाफ है। इसके बजाय वह व्यापार में बचत पर गौर करने का सुझाव दे रहा है।
मुखर्जी ने कहा कि इस बैठक का सकारात्मक नतीजा निकलना चाहिए। तभी यह संकेत जाएगा कि जी20 विश्व में मजबूत, निरंतरतापूर्वक और संतुलित आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रति गंभीर है। तभी यह संकेत मिलेगा कि यह फोरम केवल संकट के समय खड़ा होने वाला फोरम नहीं बल्कि ढांचागत समस्याओं का समाधान निकालने वाला मंच है। वित्तमंत्री ने सभी को एक डंडे से हांकने वाले समझौते के विचार का विरोध करते हुए कहा कि जिंस बाजार सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव में भी भारत का कोई हाथ नहीं है।
बकौल मुखर्जी समझौते का उद्देश्य ऐसे सांकेतिक दिशानिर्देशों का निर्धारण होना चाहिए जिससे बहुत अधिक वैश्विक आर्थिक असंतुलन से बचा जा सके। भारत ने सुझाव दिया कि असंतुलन के दिशानिर्देशों पर आम सहमति के लिए और प्रयास होने चाहिए और यदि आम सहमति नहीं बतनी है तो घोषणा पत्र के संबंधित हिस्से को हटा दिया जाना चहिए।
मुखर्जी ने कहा कि भारत मौसम संबंधी कारकों से प्रभावित होता रहता है क्योंकि इसका असर फसलों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितताओं के कारण भारत को खाद्य वस्तुओं की ऊंची और असह्य मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ा है। मुखर्जी के मुताबिक उसी समय विश्व खाद्य बाजार में भी चीजें महंगी होने से भारत को खाद्य मुद्रास्फीति से निपटने में बाहरी मदद की गुंजाइश भी कम रही।
बकौल मुखर्जी भारत को वैश्विक बाजार की अनिश्चिताताओं के कारण भी चिंता है। उन्होंने इस संबंध में जिंसों और परिसंपत्तियों की ऊंची कीमत व आर्थिक समस्याओं के ढांचागत स्वरूप का उल्लेख किया।
वित्तमंत्री ने कहा कि भारत चाहता है कि विश्व में संतुलित आर्थिक वृद्धि हो और जिन देशों के पास पूंजी ज्यादा है, उस देशों से विकासशील देशों को बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए पूंजी का स्थानातंतरण हो। जी20 भारत, चीन, रूस और ब्राजील, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्रांस जैसे कुल 20 देशों का मंच है।
एजेंसियां
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