सुप्रियो प्रसाद आजतक में लौट आए हैं। वो आज तक के नए एक्जीक्यूटिव एडिटर हैं। सुप्रियो आजतक में पहले आउटपुट हेड हुआ करते थे लेकिन जब न्यूज-24 लांच किया गया तो वे वहां मैनेजिंग एडीटर बनकर चले गए। कुछ समय पहले उन्होंने न्यूज-24 से इस्तीफा दे दिया था तभी से आजतक में उनकी वापसी के कयास लगाए जा रहे थे।
अपने आजतक में वापसी का संकेत प्रसाद ने पहले भी दिया था जब एक वेबासाईट को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि शायद उनके जीवन में एपी की गुलामी बदी है। गौरतलब है कि आजतक में लोग अरुण पुरी को एपी कहते हैं, जैसा कि हरेक बड़े संस्थान में मालिकान या हुक्मरान के नाम को संक्षिप्त रुप में बोलने का प्रचलन ही है! लोगों ने उस समय भी यहीं संकेत माना था कि सुप्रियो आजतक ही वापसी करेंगे। हां, इसकी टाईमिंग को लेकर जरुर सस्पेंस था।
आजतक के बेहतरी के दिनों में उसके नंबर वन की पोजिंशन का ज्यादातर श्रेय सुप्रियो को ही दिया गया। ऐसा बाद में साबित भी हुआ जब सुप्रियो के आजतक छोड़ने के बाद आजतक, टीआरपी की दौड़ में लगातार पिछड़ता गया। हाल के दिनों में अन्ना आन्दोलन को छोड़ दें तो टीआरपी के मामले में इंडिया टीवी लगातार आजतक से आगे ही रहा है।
सुप्रियो सन् 1995 के आईआईएमसी के ग्रेजुएट हैं और उसके बाद सीधे वे आजतक चले आए जो उस समय लांच ही हुआ था। करीब डेढ़ दशक तक आजतक के साथ काम करने के बाद सुप्रिय ‘न्यूज24′ चले आए। आजतक में सुप्रिय का आखिरी पद था एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का। वे मैनेजिंग एडिटर के रूप में ‘न्यूज 24′ लांच कराने आए। न सिर्फ आए, बल्कि आज तक के कई दिग्गजों को भी तोड़ ले आए।
बहरहाल, सुप्रियो जिस आजतक को छोड़कर गए थे वो आजतक अब नहीं है। इधर पत्रकारिता की गंगा में भी काफी पानी बहा है। जिस आजतक को सुप्रियो नंबर-1 बना सकते थे क्या उसी अंदाज में फिर से उसे वे पटरी पर ले आएंगे ये देखने की बात होगी। लेकिन इतना तो तय है कि आजतक नाम के संगठन में सुप्रियो की आभा उथल-पुथल जरूर मजाएंगी।
अगर यह निजाम परिवर्तन है तो आनेवाले दिनों में यह स्पष्ट रुप से दिखेगा। इससे कुछ लोग जरूर प्रभावित होंगे। हां, यह सही है कि आजतक जैसे हिचकोला खाते चैनल के लिए सुप्रियो की वापसी एक शुभ समाचार है।
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