यूपी को चार राज्यों में बांटने की मायावती की मांग से अगर सबसे ज्यादा कोई पार्टी सुरक्षात्मक दिख रही है तो वह कांग्रेस है। दूसरा नंबर सपा का आता है जिसका जनाधार यूं तो पूरे राज्य में है लेकिन यूपी के चार राज्य में बंट जाने की सूरत में वह किस राज्य की पार्टी बनी रहेगी इस पर वह खुद निश्चित नहीं है।
चुनावी साल में इस तरह के शगूफे कोई आश्चर्यजनक नहीं है। मायावती पहले भी यूपी को तीन टुकड़े में बांटने की बात करती रही है। ये बात अलग है कि वो खुद भी जानती है कि यह काम इतना आसान नहीं है। लेकिन जहां सत्ता के लिए घात-प्रतिघात की लड़ाई हो और नए-नए दावों के सहारे राजनीतिक गोल करने की बात हो वहां भला बहनजी क्यों चूकें ?
मायावती के इस ताजा घोषणा से ठीक एक दिन पहले राहुल गांधी ने यूपी के लोगों से बदलाव की गुहार लगाई थी और उन्हें भिखाड़ी बने रहने के लिए लताड़ा था। जाहिर है सारी फुटेज और सारा मीडिया आकर्षण राहुल उड़ा ले जा रहे थे लेकिन बहनजी ने अपनी पुरानी मांग में एक और जोड़कर उसे सामने रख दिया। यों, राहुल के उस बयान का यूपी में खासा विरोध भी हुआ और इसे प्रदेश की जनता का अपमान बताया गया।
वैसे भी मायावती ने ये दाव चलकर प्रदेश के सभी इलाकों के लोगों को सामने एक चुग्गा फेंका है और गेंद केंद्र की कांग्रेसी सरकार के पाले में डाल दी है। राहुल गांधी बुंदेलखंड को लेकर कुछ ज्यादा ही सक्रिय रहते हैं और उनकी पहल पर बुंदेलखंड को एक पैकेज भी दिया गया था। कांग्रेस ने इस बात का खासा प्रचार भी किया था। साथ ही अमेठी-रायबरेली नेहरु परिवार की सीट होने के नाते अवध क्षेत्र में भी कांग्रेस की उपस्थिति है।
लेकिन मायावती ने अपनी इस घोषणा से सारे गणित को उलटने की कोशिश की है जिसके सहारे कांग्रेंस प्रदेश में मजबूती की ओर बढ़ना चाहती है। उसने राज्य बनवाने की मांग कर अब लोगों के सामने साफ कर दिया है कि उसकी राजनीति कांग्रेस के ’पैकेज राजनीति’ से एक कदम आगे की है और कांग्रेस को अब इसका जवाब देना है।
जहांतक बात बीजेपी की है तो संघ की विचारधारा छोटे राज्यों की समर्थक है। इस लिहाज से पार्टी को यूपी के बंटवारे पर कोई खास एतराज नहीं होनी चाहिए, ये बात अलग है कि पार्टी के वरिष्ट नेता आडवाणी ने हाल ही में कहा कि इस मसले पर कुछ और मशविरे की जरूरत है।
कुल मिलाकर अभी तो यहीं लगता है कि यूपी के बंटवारे की बात चुनावी साल में राजनीतिक गोल दागने का एक दाव है जिसमें बसपा ने कांग्रेस को अपनी शैली में जवाब देने की कोशिश की है। हां, इतना जरुर है कि मायावती की इस मांग ने यूपी में अलग-अलग राज्यों निर्माण के लिए चल रहे धीमे और सुसुप्तप्राय आन्दोलन को एक नई उर्जा जरुर दे दी है। उस हिसाब से यह मांग जरुर प्रतीकात्मक महत्व की है।
bharat kumar
January 4, 2012 at 12:43 pm
हुजूर कोई व्यक्ति आलेख को सही तरीके से पढ़ सके इसके लिए यह जरुरी है कि बार-बार अप-डाउन आर्टिकल पढ़ने के दौरान ना हो…। आपसे अनुरोध है कि इस तकनीकी समस्या को दूर करें.