♦ शशि शेखर, प्रधान संपादक, हिंदुस्तान ♦ 11 सितंबर 2001, उस दिन हरारत थी। सोचा प्राइम टाइम बुलेटिन की योजना तैयार कर जल्दी घर चला चलूं। बाहर निकल रहा था…
♦ विश्वदीपक ♦ समाज सुधारक, स्वामी अग्निवेश ने कुछ किया हो या नहीं विभीषण का क्रेडिट जरूर खा गए हैं. इन दिनों कोई विभीषण का नामलेवा नहीं रह गया है.…
♦ शशि शेखर, प्रधान संपादक, हिंदुस्तान ♦ मेरे एक पत्रकार मित्र हैं। जन्म और कर्म से सौ फीसदी भारतीय। पैदा हुए तमिलनाडु में और पले-बढ़े मध्य प्रदेश में। पिछले 30…
♦ प्रणय कृष्ण, महासचिव, जन संस्कृति मंच ♦ “जिसे आप ”पार्लियामेंटों की माता” कहते हैं, वह पार्लियामेंट तो बांझ और बेसवा है. ये दोनों शब्द बहुत कडे हैं, तो भी…
♦ प्रणय कृष्ण, महासचिव, जन संस्कृति मंच ♦ (जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन से उठी बहसों पर एक श्रृंखला लिख रहे हैं. यह…
♦ पीयूष पांडे ♦ पिछले पांच अप्रैल को अन्ना हजारे जंतर-मंतर पर अनशन के लिए बैठे तो सोशल मीडिया पर उन्हें जबरदस्त समर्थन मिला। यह सोशल मीडिया की ही ताकत…
♦ शशि शेखर ♦ गए बुधवार की सुबह रांची जाना था। टैक्सी ड्राइवर को कहीं से मालूम पड़ गया कि मैं अखबारनवीस हूं। उसने पंजाबी मिश्रित हिंदी में पूछा कि…
♦ यशवंत व्यास ♦ जिनके सिर पर केश राशि नहीं है, वे बाल उगाने की कला पर बयान जारी कर रहे हैं। जिनके पेट में साठ बरस से सैकड़ों चिकन…
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