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जरूरत है थोड़ी विनम्रता की, थोड़े से असली गांधीवादी की

जरूरत है थोड़ी विनम्रता की, थोड़े से असली गांधीवादी की

♦ तवलीन सिंह ♦ अन्ना हजारे के खिलाफ इस समय कुछ भी बोलना भगवान के खिलाफ बोलने के समान है। फिर भी बोलने पर मजबूर हूं मैं एक जिम्मेदार पत्रकार…

गैरजिम्मेदारी और भ्रष्टाचार के सायों से घिरी मीडिया की साख अब दांव पर

गैरजिम्मेदारी और भ्रष्टाचार के सायों से घिरी मीडिया की साख अब दांव पर

सबको खबर देने और सबकी खबर लेने का दावा करने वाला, अपने को जनता का पक्षधर और सबसे तेज, निर्भीक व निष्पक्ष बताने वाला मीडिया राडिया टेपों के प्रकाश में…

तुच्छ सियासी फायदे के लिए किया गया आरक्षण का बेजा इस्तेमाल

तुच्छ सियासी फायदे के लिए किया गया आरक्षण का बेजा इस्तेमाल

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-340 में कहा गया है कि ‘राष्ट्रपति भारत के सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं व कठिनाइयों के अन्वेषण के लिए और उन कठिनाइयों…

बाबासाहेब अंबेडकर की याद में लगा मुंबई में मेला

बाबासाहेब अंबेडकर की याद में लगा मुंबई में मेला

दिल्ली में रहने वालों को महान नेताओं की समाधियों के बारे में खासी जानकारी रहती है। लगभग हर महीने ही सरकारी तौर पर समाधियों पर फूल माला चढ़ती रहती है।…

मोल-भाव की राजनीति ने बेशर्मी की सीमाएं पार कर दी हैं

मोल-भाव की राजनीति ने बेशर्मी की सीमाएं पार कर दी हैं

भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें क्या इतने गहरे पैठ गई हैं कि अब उनसे पार पाना नामुमकिन हो गया है? क्या इसके लिए सिर्फ राजनेता, गठबंधन की राजनीति और लोलुप…

राजदीप जैसों की मजबूरी और अठन्नी के भाव बिकती पत्रकारिता

राजदीप जैसों की मजबूरी और अठन्नी के भाव बिकती पत्रकारिता

मीडिया इंडस्ट्री में सबसे कमजोर, लाचार और निरीह कोई है, तो वो हैं राजदीप सरदेसाई। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि सैलरी, शख्सीयत और शोहरत के लिहाज से जिस टेलीविजन…

नीतीश याद रखें कि जात-पात से ऊपर एक नया हिंदुस्तान बन रहा है

नीतीश याद रखें कि जात-पात से ऊपर एक नया हिंदुस्तान बन रहा है

चुनाव के दौरान लालू यादव से मिलने गया था। अभी बैठा ही था कि लालू बोल उठे, अरे वो चैनल वाला आया था। पैसे मांग रहा था। मैंने मना कर…

क्या नरेंद्र मोदी हैं गुजरात के माओत्से तुंग?

क्या नरेंद्र मोदी हैं गुजरात के माओत्से तुंग?

अहमदाबाद के उन अनाम युवा छात्र-छात्राओं ने राहुल गांधी से बिल्कुल सही व जरूरी सवाल पूछे और पूरी विनम्रता से पूछे। उन्होंने इस बात का भी सबूत दिया कि आज…

कौन है वो ताकत जिसके आगे संसद की भी नहीं चलती

कौन है वो ताकत जिसके आगे संसद की भी नहीं चलती

आजादी के बाद भारत ने राजकाज के लिए संसदीय लोकतंत्र प्रणाली को चुना और इस नाते देश के लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का सबसे प्रमुख मंच हमारे…

बिहार के नतीजों से कूप-मंडूक पत्रकार सबक लें, निजी कुंठाओं से ऊपर उठें

बिहार के नतीजों से कूप-मंडूक पत्रकार सबक लें, निजी कुंठाओं से ऊपर उठें

बुजुर्ग युगेश्वर पांडेय बिहार वाणिज्य मंडल और मगध स्टॉक एक्सचेज के अध्यक्ष रह चुके हैं। इन पंक्तियों का लेखक उनके ही गांव के बगल का मूल निवासी है। मेरे दिवंगत…