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‘राजवंशों’ के साये में सिसकता असली लोकतंत्र

‘राजवंशों’ के साये में सिसकता असली लोकतंत्र

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ताज़ा-ताज़ा सरकार बनी है। ये सरकार चुनी तो करोड़ों मतदाताओं के वोट से गई है, लेकिन इसमें दबदबा है देश के गिने-चुने परिवारों का।…

चौकीदार का चोर होना

चौकीदार का चोर होना

((हिंदी के सबसे बड़े और सम्मानित पत्रकार प्रभाष जोशी हाल में संपन्न आम चुनावों के दौरान खबरों की खरीद-फऱोख्त के शर्मनाक धंधे के खिलाफ खम ठोककर मैदान में उतर पड़े…

“पत्रकार दिखे तो गोली मार देना”

“पत्रकार दिखे तो गोली मार देना”

((कुछ दिन पहले जनतंत्र पर आपने वरिष्ठ पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी जी के लेख का पहला हिस्सा पढ़ा। “सारे पत्रकार दलाल बन गए हैं” में उन्होंने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के सच…

ख़बरों के पैकेज का काला धंधा

ख़बरों के पैकेज का काला धंधा

ख़बरों का सौदा होता है। ये हम ही नहीं, हिंदी के सबसे बड़े पत्रकार प्रभाष जोशी भी कह रहे हैं। 10 मई को “जनसत्ता” में उन्होंने इस डरावने सच को…

“सारे पत्रकार दलाल बन गए हैं”

“सारे पत्रकार दलाल बन गए हैं”

((सत्ता का आतंक क्या होता ये जानना है तो आप छत्तीसगढ़ जाइये। वहां सरकार और कंपनियों की तानाशाही चल रही है। इस तानाशाही के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की जगह मीडिया…