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यह भी सही है, वो न्यास न्यास खेलें, हम परंपरा संभालेंगे

यह भी सही है, वो न्यास न्यास खेलें, हम परंपरा संभालेंगे

दो दिन तक दिल्ली रहा और उससे पहले नैनीताल। चार दिन बाद आज लौटा हूं तो लगा कुछ बाते साफ हो जानी चाहिए। दिल्ली में श्रमजीवी पत्रकारों के लिए केंद्र…

कब तक दूसरों की भाषा बोलोगे संदीप?

कब तक दूसरों की भाषा बोलोगे संदीप?

इसका क्या करे कि प्रभाष परंपरा न्यास के सूत्रधारों ने कवच के तौर पर हमारे प्रभाष जी के बड़े बेटे और क्रिकेट के शानदार खिलाड़ी संदीप जोशी को इस्तेमाल किया।…

प्रभाष जोशी को उद्देश्य से ज्यादा उत्सव प्रिय थे

प्रभाष जोशी को उद्देश्य से ज्यादा उत्सव प्रिय थे

प्रभाष जोशी ‘हाइवे’ पर रहते हुए भी पगडंडी के लोग थे। उनको उद्देश्य से ज्यादा उत्सव प्रिय थे। इसलिए न्यास का एक उद्देश्य उत्सव भी है।…

“हम शिखंडियों की जमात से लड़ेंगे, पीछे नहीं हटेंगे”

“हम शिखंडियों की जमात से लड़ेंगे, पीछे नहीं हटेंगे”

अगर कर्ण जैसी मज़बूरी की वज़ह से भी आपको उसका मुक़ाबला करना पड़े तो भी आप दुःशासन या दुर्योधन की भांति उसकी पत्नी पर कटाक्ष करके अपनी बहादुरी या मर्दानगी…

अब बड़ी लकीर खींची जाए

अब बड़ी लकीर खींची जाए

प्रभाष जोशी के बनाए जनसत्ता को आज भी बदले हुए हालत में हम लोग निकाल रहे है। आलोचना करना बहुत आसान होता है और कुछ कर दिखाना बहुत मुश्किल। फिर…

प्रभाष जी के न्यास के बारे में मेरा आखिरी बयान

प्रभाष जी के न्यास के बारे में मेरा आखिरी बयान

अच्छा भैया, न्यास बन गया। भोजन, भजन और भाषण हो गये। न्यास को जो करना था वह करेगा या नहीं करेगा, यह पता नहीं। लेकिन जिस चीज से अपना कोई…

उनसे क्या संकोच जो प्रभाष “वटवृक्ष” के नीचे कांव-कांव कर रहे हैं

उनसे क्या संकोच जो प्रभाष “वटवृक्ष” के नीचे कांव-कांव कर रहे हैं

पत्रकारिता में प्रभाष जोशी की असल परपंरा क्या मानी जाए यह वे निर्धारित करें जिन्होंने लंबे समय तक उनके साथ काम किया है, उन्हें जाना है, समझा है और उनके…

पेश है प्रभाष परंपरा की संघी रचनात्मकता का पहला नमूना

पेश है प्रभाष परंपरा की संघी रचनात्मकता का पहला नमूना

भगवा रंग में रंगा प्रभाष परंपरा न्यास ने काम शुरू कर दिया। कैंसर से जूझ रहे साथी आलोक तोमर को धमकाने की कोशिश की गई तो अपनी जिस बहू सुप्रिया…

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

बचपन में एक किस्सा सुनते थे कि एक राजा ने बंदर पाल रखा था। एक दिन सोते वक़्त उसने बंदर से कहा कि किसी को पास मत फटकने देना। आज्ञाकारी…