♦ मां, मुझे सिर्फ मेरी आज़ादी दे दो। रो कर या प्यार से मुझे वापस न बुलाओ। मैं घर आने से सिर्फ इसलिए डरता हूं कि अगर घर पर ये…
हमारे यहां पिक्चरों में मोची, चमार, बार्बर, तेली जैसे शब्द काट दिये जाते हैं, क्योंकि उनके जो पॉलिटिकल रिप्रजेंटेटिव हैं, वो आई और बी मिनिस्ट्री पे चढ़ बैठते हैं, जो…
यह बहसतलब की ही कड़ियां हैं। अभिव्यक्ति माध्यमों में आम आदमी की बहस हैबिटैट से निकल कर यहां, मोहल्ला लाइव पर शुरू हुई। शीबा ने सवाल उठाया था कि हिंदी…
राजू रंजन प्रसाद प्रगतिशील विचारों वाले बेहद शालीन और सज्जन शख़्स हैं। इतिहास और समाजशास्त्र में गहरी पैठ है। पटना से उन्होंने पीएचडी की है। कुछ खास मसलों पर समझौता…
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