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Home » Posts tagged with » Anwar Jamal Ashraf

ब्राजील के सामने हॉलैंड का नारंगी सांबा

ब्राजील के सामने हॉलैंड का नारंगी सांबा

पोर्ट एलिजाबेथ में जो हुआ, उसने सन्नाटा फैला दिया. नीले पीले रंगों से लबरेज खुशनुमा चेहरे बेजान तस्वीरों में बदल गए. नगाड़ों के धुनों पर थिरकती टांगें थम गईं. पर…

तु्म्हें सत्येंद्र दुबे और मंजूनाथ से सीखना चाहिए था सतीश

तु्म्हें सत्येंद्र दुबे और मंजूनाथ से सीखना चाहिए था सतीश

सतीश शेट्टी, तुमने हिम्मत कैसे की. कैसे राज़ खोल दिया ग़ैरक़ानूनी ज़मीन पर बने बंगलों का. कैसे बता दिया दुनिया को कि किसानों को बहका कर उनकी ज़मीनें हड़पी जा…

बुश पर जूता फेंकने वाले पत्रकार पर पड़ा जूता

बुश पर जूता फेंकने वाले पत्रकार पर पड़ा जूता

जॉर्ज बुश पर जूता फेंकने वाले इराक़ी पत्रकार मुंतज़र अल ज़ैदी को भी ठीक वैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा, जब पेरिस में उन पर इराक़ के ही एक…

सचिन को बाल ठाकरे की धमकी पर मुंबई शर्मिंदा है

सचिन को बाल ठाकरे की धमकी पर मुंबई शर्मिंदा है

मुंबई शर्मिन्दा है. वह समझ नहीं पा रही है कि हंसे या रोए. जब सचिन को उनके क्रिकेट की 20वीं सालगिरह पर तोहफ़ा देना था, तो उनका दिल तोड़ दिया.…

यहां का बेटा, वहां का बेटा

यहां का बेटा, वहां का बेटा

स्पेन में छुट्टी मनाने का मौक़ा मिला तो बड़ा मज़ा आया. छोटे से द्वीपीय शहर मलागा में समुद्र किनारे धूप सेंकने का भी मौक़ा मिला. बचपन में जो कहानियों और…

"संस्कृति के ठेकेदारो, कहां हो"

"संस्कृति के ठेकेदारो, कहां हो"

बड़ी अजीब बात है. कोई सामने आता ही नहीं. अभी दो तीन महीने पहले ही तो ढोल नगाड़े लेकर सच का सामना के ख़िलाफ़ जंग छेड़ी गई थी. अब कार्यक्रम…

सपनों में दौड़ती-भागती इलेक्ट्रिक कारें

सपनों में दौड़ती-भागती इलेक्ट्रिक कारें

ज़रा सोचिए. कार ऐसी बने, जिसमें साइलेंसर न हों. टंकी न हो.. वह बिजली से चल पड़े, पेट्रोल पंपों की जगह बैटरी चार्ज करने के स्टेशन बन जाएं, ठीक मोबाइल…

एक नज़र इन हसीन कारों पर भी

एक नज़र इन हसीन कारों पर भी

फ्रैंकफर्ट कार मेला की चंद तस्वीरें डॉयचे वेले के पत्रकार अनवर जमाल अशरफ़ के कैमरे की नज़र से।   —————————————– ————————————– ———————————– ————————————– ———————————-…

"नाराज़गी इसलिए तो नहीं कि लेखक "अनवर" है"

"नाराज़गी इसलिए तो नहीं कि लेखक "अनवर" है"

अनवर जमाल अशरफ़ के लेख के बाद “सच का सामना” पर होने वाली बहस ने नया मोड़ ले लिया है। समरेंद्र के दोनों लेख – लूटपाट, क़त्ल और व्यभिचार के…

"…तो भाड़ में जाए ऐसी संस्कृति"

"…तो भाड़ में जाए ऐसी संस्कृति"

अगर आधे घंटे का एक टेलीविज़न शो सदियों पुरानी संस्कृति को उखाड़ फेंक रहा हो, तो भाड़ में जाए ऐसी संस्कृति। ऐसी कमज़ोर और बेबुनियाद संस्कृति, जो हज़ारों साल पुरानी…