रामकुमार सिंह– यह सिनेमा पर बहस से इतर बहसतलब के माहौल को बताने की कोशिश है। बौद्धिक विमर्श इस पोस्ट में मेहमान की तरह दिख जाए तो बात अलग है,…
बहसतलब पर आपने अलग अलग लेखकों द्वारा अलग अलग रिपोर्ट की झलक देखी । दरअसल ज्यादातर रिपोर्टों को प्रकाशित करने का हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि हमारे पाठक यह…
अविनाश ने जो बातें कही हैं , उनमें बहुत दम है। और इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि “अश्लीलता कोई राजनीतिक या सामाजिक (या यहां तक कि निजी)…
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