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Home » Posts tagged with » Bichitra Mani

पोस्टर छाप पोलटिक्स

पोस्टर छाप पोलटिक्स

कुल जमा तीन जन थे। रात कमर तक घनी हो चुकी थी और ठंड की ठिठुरन में उनका हाल बहुत बुरा नहीं तो बुरा तो कहा ही जाएगा। एक आदमी…

हमारा और आपका गुनाह भी कम नहीं

हमारा और आपका गुनाह भी कम नहीं

हिमांशु जी ने दफ्तर में पूछा कि आपने कुछ लिखा क्यों नहीं? मैंने उन्हें बताया कि जानकारी जो मुझे मिली है, उसे लिखा नहीं जा सकता। फिर भी लिखूंगा लेकिन…

इस संसद का क्या करें?

इस संसद का क्या करें?

“आजतक एक भी चीज को पार्लियामेंट ने ठिकाने लगाया हो, ऐसी कोई मिसाल देखने में नहीं आती। बड़े सवालों की चर्चा जब पार्लियामेंट में चलती है, तब उसके मेंबर पैर…

वाजपेयी "देवतुल्य" हैं, अंगुली उठाओगे तो पाप लगेगा!

वाजपेयी "देवतुल्य" हैं, अंगुली उठाओगे तो पाप लगेगा!

लिब्रहान आयोग की रपट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। सारे राजनीतिक दल अपनी सुविधा के मुताबिक उसका खंडन-मंडन कर रहे हैं। लेकिन लिब्रहान आयोग में एक अदद नाम ने…

इतनी जल्दी क्यों कर दी, प्रभाष जी?

इतनी जल्दी क्यों कर दी, प्रभाष जी?

कागद तो आगे भी कारे होंगे लेकिन वैसे नहीं जैसे प्रभाष जी किया करते थे। लिखना चलता रहेगा। लिखने वाले दूसरे आ जाएंगे लेकिन कभी खुशियों की अंतहीन ऊंचाई पर…

ये क्रिकेट का नेपोलियन है

ये क्रिकेट का नेपोलियन है

अगर खेल का आनंद लेना है तो हार-जीत को बगल की मेज पर रख दीजिए। हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत का पांचवा वनडे मैच भी हार-जीत से ज़्यादा खेल…

प्रभाष जी की कमी हमेशा खलेगी

प्रभाष जी की कमी हमेशा खलेगी

भारत-ऑस्ट्रेलिया वनडे मैच देखते हुए यही सोच रहा था कि सचिन के सत्रह हजारी होने पर प्रभाष जी जरूर लिखेंगे। सच कहें तो मैच देखने से उनके लिखे को पढ़ना…

श्रद्धांजलि और सम्मान पर उनका भी हक है

श्रद्धांजलि और सम्मान पर उनका भी हक है

चाहे अखबार हों या न्यूज चैनल, हर जगह इंदिरा गांधी छायी रहीं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। वह 17 साल तक देश की प्रधानमंत्री रहीं और विवादों के साये…

सड़ना मंजूर मगर मरना नहीं

सड़ना मंजूर मगर मरना नहीं

“एक मजदूर काफी बूढ़ा हो गया था। बदन में इतनी शक्ति नहीं थी कि वह मजदूरी कर सके। लेकिन संतान नालायक थीं, इसलिए वृद्धावस्था में भी उसे काम करना पड़ता…

अपने-अपने गांधी, अपने-अपने राम

अपने-अपने गांधी, अपने-अपने राम

गांधी टाइटल लगाकर कितने लोग घूमते हैं लेकिन गांधी सुनकर तो जेहन में एक ही नाम घूमता है- मोहनदास करमचंद गांधी। इन्हें हिंदुस्तान अपना राष्ट्रपिता और दुनिया महात्मा मानती है।…

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