कुल जमा तीन जन थे। रात कमर तक घनी हो चुकी थी और ठंड की ठिठुरन में उनका हाल बहुत बुरा नहीं तो बुरा तो कहा ही जाएगा। एक आदमी…
हिमांशु जी ने दफ्तर में पूछा कि आपने कुछ लिखा क्यों नहीं? मैंने उन्हें बताया कि जानकारी जो मुझे मिली है, उसे लिखा नहीं जा सकता। फिर भी लिखूंगा लेकिन…
“आजतक एक भी चीज को पार्लियामेंट ने ठिकाने लगाया हो, ऐसी कोई मिसाल देखने में नहीं आती। बड़े सवालों की चर्चा जब पार्लियामेंट में चलती है, तब उसके मेंबर पैर…
कागद तो आगे भी कारे होंगे लेकिन वैसे नहीं जैसे प्रभाष जी किया करते थे। लिखना चलता रहेगा। लिखने वाले दूसरे आ जाएंगे लेकिन कभी खुशियों की अंतहीन ऊंचाई पर…
अगर खेल का आनंद लेना है तो हार-जीत को बगल की मेज पर रख दीजिए। हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत का पांचवा वनडे मैच भी हार-जीत से ज़्यादा खेल…
भारत-ऑस्ट्रेलिया वनडे मैच देखते हुए यही सोच रहा था कि सचिन के सत्रह हजारी होने पर प्रभाष जी जरूर लिखेंगे। सच कहें तो मैच देखने से उनके लिखे को पढ़ना…
चाहे अखबार हों या न्यूज चैनल, हर जगह इंदिरा गांधी छायी रहीं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। वह 17 साल तक देश की प्रधानमंत्री रहीं और विवादों के साये…
“एक मजदूर काफी बूढ़ा हो गया था। बदन में इतनी शक्ति नहीं थी कि वह मजदूरी कर सके। लेकिन संतान नालायक थीं, इसलिए वृद्धावस्था में भी उसे काम करना पड़ता…
गांधी टाइटल लगाकर कितने लोग घूमते हैं लेकिन गांधी सुनकर तो जेहन में एक ही नाम घूमता है- मोहनदास करमचंद गांधी। इन्हें हिंदुस्तान अपना राष्ट्रपिता और दुनिया महात्मा मानती है।…
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