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खतरे में है बिहार की डॉल्फिन

खतरे में है बिहार की डॉल्फिन

विलुप्तप्राय डॉल्फिनों की तादाद बिहार में कम होती जा रही है। डॉल्फिनों के लगातार होते शिकार को इसका कारण बताया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2009 में लागू…

कानून के शासन को बहाल करने का वादा पूरा किया: नीतीश

कानून के शासन को बहाल करने का वादा पूरा किया: नीतीश

((बिहार के मुख्यमंत्री इन दिनों ब्लॉग लिख रहे हैं। ताज़ा ब्लॉग उन्होंने बिहार में अपराध के नियंत्रण पर लिखा है। बताया है कि कैसे बिहार को अपराधियों से मुक्त किया…

नीतीश की ‘विश्वास यात्रा’ शुरू

नीतीश की ‘विश्वास यात्रा’ शुरू

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी विश्वास यात्रा का प्रारंभ गुरुवार को पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड के बग्घी गांव से किया। मुख्यमंत्री ने एक सभा में कहा…

बिहार में तेज़ी से पनप रहा है तेलंगाना

बिहार में तेज़ी से पनप रहा है तेलंगाना

नीतीश राज में 11 फीसदी विकास के डंके का शोर अब कर्कश लगने लगा है। कर्कश सिर्फ़ इसलिए नहीं कि राज्य और नेशनल मीडिया उसे करीने से छाप रहा है,…

“जिम्मेदारी तो संपादक को ही लेनी पड़ती है”

“जिम्मेदारी तो संपादक को ही लेनी पड़ती है”

बिहार में दैनिक जागरण और उसके संपादक पर उठाए गए सवाल पर बहस अब तेज़ हो रही है। बहस का मुद्दा है कि अगर किसी अख़बार से कोई ग़लती हो…

दैनिक भास्कर की चोरी, ऊपर से सीनाजोरी

दैनिक भास्कर की चोरी, ऊपर से सीनाजोरी

आज दैनिक भास्कर के  राष्ट्रीय संस्करण में भी अभिलाष खांडेकर के महान विचार छप गए। मध्य प्रदेश के एडिशन में की गई उनकी विशेष टिप्पणी (भोपाल को बिहार होने से…

पूरे देश से माफी मांगें अभिलाष खांडेकर

अभी मोहल्ला लाइव पर मौजूद एक ख़बर पर मेरी नज़र पड़ी। सोच कर हैरानी हुई। क्या किसी अख़बार का संपादक इतनी संकीर्ण सोच रख सकता है? और सपाट शब्दों में…

जिसकी जैसी मार्केटिंग, उसको वैसा वोट

जिसकी जैसी मार्केटिंग, उसको वैसा वोट

जनसत्ता में आज वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष का लेख छपा है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले अरविंद पटना में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके हैं और वो…

बिहार की गुलाम पत्रकारिता ((पार्ट – 2))

बिहार की गुलाम पत्रकारिता ((पार्ट – 2))

बीते एक दशक में मीडिया का स्वरूप जितनी तेज़ी से बदला है, उतनी ही तेज़ी से उसे नियंत्रित कर हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की चाहत भी बढ़ी है।…

बिहार की गुलाम पत्रकारिता ((पार्ट – 1))

बिहार की गुलाम पत्रकारिता ((पार्ट – 1))

बिहार की राजधानी पटना में विकास के नाम पर एक केऑस (अफरा-तफरी) नज़र आता है। जगह जगह गड्ढे खुले पड़े हैं। जो परियोजाएं एक दो साल में पूरी हो जानी…