हम यह बता चुके हैं कि एडवांस स्टडी, शिमला में मीडिया में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी पर बहस हुई। उसी बहस में प्रमोद रंजन ने अपना शोधपत्र पढ़ा।…
अभय कुमार दुबे - मैं अपनी बात एक सवाल से शुरू करुंगा। दलित, पिछड़ी और दूसरी पूंजी इस वक़्त कहां है? इस वक़्त पूंजी पर ऊंची जातियों का, ऊंचे तबके…
मीडिया सामाजिक बदलावों का नहीं बल्कि यथास्थिति बनाए रखने का हथियार है। ऐसा हथियार जिसके ज़रिए अगड़ी जातियों के लोग अवर्णों का हक़ मार रहे हैं। यह एक बहुत ही…
श्रीमान प्रभाष जोशी और राजेंद्र यादव, मेरे करीबी रिश्तेदारों में कई जातियों के लोग हैं। ब्राह्मण से लेकर कायस्थ और नायर से लेकर दलित तक। ये सभी परिवार प्रेम से…
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