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प्रेस की आज़ादी के नाम पर सवर्णों का क्रूर खेल

प्रेस की आज़ादी के नाम पर सवर्णों का क्रूर खेल

मीडिया सामाजिक बदलावों का नहीं बल्कि यथास्थिति बनाए रखने का हथियार है। ऐसा हथियार जिसके ज़रिए अगड़ी जातियों के लोग अवर्णों का हक़ मार रहे हैं। यह एक बहुत ही…

“हम” टिके हैं और टिके रहेंगे प्रभाष जोशी

“हम” टिके हैं और टिके रहेंगे प्रभाष जोशी

कुछ दिन पहले एक पत्रकार साथी ने सरसरी तौर पर एक बात कही। उन्होंने बताया कि “बिहार और झारखंड के मीडिया सर्किल के एक ख़ास तबके के बीच एक चर्चा…

प्रमोद रंजन के इसी लेख पर बिफरे हैं प्रभाष जोशी

प्रमोद रंजन के इसी लेख पर बिफरे हैं प्रभाष जोशी

प्रभाष जोशी ने प्रमोद रंजन के जिस लेख का जवाब दिया है वो लेख एक व्यापक नज़रिए से लिखा गया है। इसमें प्रमोद रंजन ने कहीं नहीं कहा है कि…

“मनुवादी” प्रभाष जोशी का प्रवचन सुनिए!

“मनुवादी” प्रभाष जोशी का प्रवचन सुनिए!

चलिए प्रभाष जोशी ने जवाब तो दिया वरना हमें तो लगने लगा था कि उम्र की इस दहलीज पर आ कर उन्हें सुनाई और दिखाई कम देने लगा है। तभी…

साधु की जात, मीडिया की बात यानी मृणाल-योगेंद्र संवाद

साधु की जात, मीडिया की बात यानी मृणाल-योगेंद्र संवाद

“बेशक साधु की जाति न पूछें। लेकिन साधु के भेष में आने वाले हर व्यक्ति के बारे में इतनी जांच तो जरूर कर लें कि वह साधु है भी या…

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

बचपन में एक किस्सा सुनते थे कि एक राजा ने बंदर पाल रखा था। एक दिन सोते वक़्त उसने बंदर से कहा कि किसी को पास मत फटकने देना। आज्ञाकारी…

सच में बहुत जातिवादी है मीडिया

सच में बहुत जातिवादी है मीडिया

एसपी का साक्षात्कार जब छपा था (13 साल पहले) तबसे लेकर अब तक हालात में कोई बड़ी तब्दीली नहीं आई है। मुझे याद है साल 2004 में आईआईएमसी के मेरे…

"प्रभाष जोशी पर सवाल उठाने वाले लफंगे हैं"

"प्रभाष जोशी पर सवाल उठाने वाले लफंगे हैं"

प्रभाष जोशी चुप हैं। चुप्पी एक हथियार है। वो हथियार जिससे सत्ता बड़े से बड़े आंदोलन को दबाती है। प्रभाष जोशी पत्रकारिता के शलाका पुरुष हैं। वो इस हथियार से…

“प्रभाष जोशी” के जातिवाद पर बहस बंद नहीं होगी

“प्रभाष जोशी” के जातिवाद पर बहस बंद नहीं होगी

प्रभाष जोशी के इंटरव्यू पर जो बहस शुरू हुई है – उस पर कुछ “जनसत्ताइयों” की प्रतिक्रया आई है। उन सभी का एक ही दर्द है कि प्रभाष जोशी के…

जिसकी जितनी जातीय औकात, उतना उसका प्राप्य

जिसकी जितनी जातीय औकात, उतना उसका प्राप्य

“……..अपने यहां मुसलमान कौन हुए? मुसलमान वो हुए, जो हाथ से काम करने वाले लोग थे. जुलाहे, लोहार, कुम्हार जो-जो भी हाथ से काम करने वाले लोग थे और जिनको…

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