♦उदय प्रकाश♦ सारे पूर्वाग्रहों-दुराग्रहों को छोड़ कर इस सच को अब मान ही लेना चाहिए कि ‘हिंदी’ एक बहुत अधिक समस्याग्रस्त शब्द है। यह उतना निरापद और एकार्थी, सीधा-सादा और…
रथयात्रा के दौरान बिहार में आडवाणी की गिऱफ़्तारी के बाद देश में जातीय और सांप्रदायिक राजनीति के घोड़े दौड़ने लगे और जनता की बुनियादी समस्याएं नज़रअंदाज़ हो गयीं। भाजपा के…
जाति आधारित जनगणना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए गले की फांस बन गया है। पार्टी ने भले ही सार्वजनिक तौर पर इसका समर्थन किया हो लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ…
बीस साल पहले जब मंडल रिपोर्ट लागू होने पर देश भर में आत्मदाह और आगजनी का तूफान उठा था तो इन पंक्तियों के लेखक ने बुद्धिजीवियों पर एक सरसरी सर्वेक्षण…
मीडिया सामाजिक बदलावों का नहीं बल्कि यथास्थिति बनाए रखने का हथियार है। ऐसा हथियार जिसके ज़रिए अगड़ी जातियों के लोग अवर्णों का हक़ मार रहे हैं। यह एक बहुत ही…
बचपन में एक किस्सा सुनते थे कि एक राजा ने बंदर पाल रखा था। एक दिन सोते वक़्त उसने बंदर से कहा कि किसी को पास मत फटकने देना। आज्ञाकारी…
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