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गांव के स्कूल में सुना। धोती-कुर्ता वाले मास्टर से। भावार्थ था- अगर जीवन में धन चला जाये, कोई चिंता नहीं। मान लो कुछ नहीं खोया। स्वास्थ्य गिरा, तो समझो नुकसान…
April 25, 2010 / No Comment / Read More
मुद्दे, राजनीति के सुहाग हैं. बिन मुद्दे राजनीति उजड़ी, सूनी और अर्थहीन है. प्रसंग था, अर्थनीति, महंगाई और देश के गरीब. लोकसभा में डॉ राममनोहर लोहिया ने पहले ही भाषण…
November 30, 2009 / No Comment / Read More
क्या कभी हमारे देश का राजनीतिक माहौल ऐसी शर्मनाक स्थिति में रहा है, जैसा की अभी है? अख़बारों के पहले पन्ने पर जिस तरह की ख़बरें रोज़ आ रही हैं,…
November 27, 2009 / 2 Comments / Read More
पहले चरण में वोट फ़ीसदी घटा है. झारखंड विधानसभा चुनावों में. एक स्रोत का मानना है, बीस वर्षों में सबसे कम मत पड़े. खासतौर से शहरों में. इससे क्या संकेत…
November 27, 2009 / No Comment / Read More
दिग्गज वोट मांगते घूम रहे हैं. जिनके दर्शन दुर्लभ हैं, जो सुरक्षा प्राचीरों में घिरे हैं, या जिनके जीवन का महत्वपूर्ण भाग पांच सितारा सुविधाओं में कटता है, वे गली-गांव…
November 20, 2009 / No Comment / Read More
इस देश में एक प्रधानमंत्री हुआ करते थे। नाम था पीवी नरसिंह राव। सुना है बड़े विद्वान थे। कई भाषाओं पर उनका अधिकार था। हिंदी तो वे बोलते ही थे,…
August 30, 2009 / 2 Comments / Read More
आदरणीय मॉडरेटर, मैं आपकी थोड़े दिनों में मशहूर हो गयी वेबसाइट पर लगातार तथागत के लिखे को पढ़ रहा हूं। उनकी राइटिंग इस बात की ओर इशारा करती है कि…
August 25, 2009 / 12 Comments / Read More
प्रभात खबर में भी वही नज़ारे देखने को मिलते हैं, जो कि पूरे देश के मीडिया में आम हैं। यानी सवर्ण बहुमत वाली संपादकीय टीम। बिज़नेस, सर्कुलेशन आदि विभागों में…
August 24, 2009 / 11 Comments / Read More
मुझे साइट मॉडरेटर ने बताया कि लोगों की दिलचस्पी इस बात में है कि तथागत कौन है। ये एक स्वाभाविक सवाल है। इसलिए भी, क्योंकि लोगों की दिलचस्पी इस बात…
August 20, 2009 / 3 Comments / Read More
मुद्दे प्रभात खबर के लिए जरूरत भर होते हैं। ये अखबार बड़ी पार्टियों के एजेंट की तरह काम करता है। कहा जा सकता है कि छोटी और अल्पकालिक पार्टियों की…
August 18, 2009 / 2 Comments / Read More
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