हिमांशु जी ने दफ्तर में पूछा कि आपने कुछ लिखा क्यों नहीं? मैंने उन्हें बताया कि जानकारी जो मुझे मिली है, उसे लिखा नहीं जा सकता। फिर भी लिखूंगा लेकिन…
अरी बिटिया रुचिका, अच्छा हुआ, तुम सिधार गई. 19 साल बाद आज के इस हालात से तो बेहतर है कि तुम पहले ही चली गई. क्यों कहूं मैं कि तुम…
टीवी चैनलों पर चंडीगढ़ की विशेष अदालत के बाहर एसपीएस राठौर को हंसते, खिलखिलाते देखा तो लगा सरकार ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी को किसी बड़े सम्मान से नवाज़ा हो।…
रुचिका के साथ छेड़खानी और उसकी आत्महत्या के मामले में भारतीय न्यायव्यवस्था ने कुछ नया या अजूबा नहीं किया है। न्यायप्रक्रिया में धन और रुतबे के महत्व के बारे में…
इस मामले (रुचिका के साथ हुई छेड़खानी और उसके बात पुलिसिया जुल्मों के जरिए उसे आत्महत्या के मुंह में ढकेलने और इस संगीन मामले में अदालत के बेतुके फैसले) को…
अपराधियों को लेकर भी मीडिया का चरित्र दोहरा है। अगर किसी साधारण शख़्स के ख़िलाफ़ अपराध साबित नहीं हुआ हो तो भी पत्रकार उसके लिए सख़्त भाषा का इस्तेमाल करते…
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