मैं जनसत्ता रोज नहीं मंगाता। सिर्फ़ संडे के संडे जनसत्ता पढ़ता हूं। लेकिन प्रभाष जोशी के निधन के बाद जनसत्ता बेरंग, बेरस नज़र आ रहा था। दो पुस्तक समीक्षाएं पहले…
आज जनसत्ता के पहले पन्ने पर कुल दस ख़बरें हैं जिनमें से चार वामपंथ की अलग-अलग धाराओं से जुड़ी हैं। अख़बार की पहली लीड है – “माओवादियों पर नकेल के…
जनसत्ता के पहले संपादक प्रभाष जोशी को लगभग ढाई दशक पहले जब पत्रकारों की टीम बनाने का पहला मौका मिलता है तो कुछ ऐसी टीम बनती है। ये है जनसत्ता…
जनसत्ता में आज वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष का लेख छपा है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले अरविंद पटना में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके हैं और वो…
वर्तमान में मीडिया के दो चेहरे हैं। मुखौटा हटाने पर नज़र आने वाला असली चेहरा इतना विकृत है कि सिर शर्म से झुक जाता है। इस चुनाव में मीडिया ने…
((हिंदी के सबसे बड़े और सम्मानित पत्रकार प्रभाष जोशी हाल में संपन्न आम चुनावों के दौरान खबरों की खरीद-फऱोख्त के शर्मनाक धंधे के खिलाफ खम ठोककर मैदान में उतर पड़े…
ख़बरों का सौदा होता है। ये हम ही नहीं, हिंदी के सबसे बड़े पत्रकार प्रभाष जोशी भी कह रहे हैं। 10 मई को “जनसत्ता” में उन्होंने इस डरावने सच को…
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