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सवाल पत्रकारिता का और निजी हमले होने लगे

सवाल पत्रकारिता का और निजी हमले होने लगे

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने एक सवाल उठाया। पत्रकारों के हितों से जुड़ा सवाल। तो लोग व्यक्तिगत हमलों पर उतर आए। हमारा हिंदी समाज ही कुछ ऐसा है। गंभीर…

अक्सर पत्रकारों को डराती-धमकाती हैं ममता

अक्सर पत्रकारों को डराती-धमकाती हैं ममता

ममता बनर्जी को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वो बेहद डरी हुई महिला हैं। उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया उनके ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है। उन्हें अपनी…

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

कहीं प्रभाष जोशी को निपटा तो नहीं रहे आलोक तोमर?

बचपन में एक किस्सा सुनते थे कि एक राजा ने बंदर पाल रखा था। एक दिन सोते वक़्त उसने बंदर से कहा कि किसी को पास मत फटकने देना। आज्ञाकारी…

कमाल है प्रभाष जी, आप कुछ बोलते क्यों नहीं?

कमाल है प्रभाष जी, आप कुछ बोलते क्यों नहीं?

“पटना में इस बार एक नए पाठक मिले।… युगेश्वर पांडेय। कहने आए थे कि पिछले लोकसभा चुनाव में अखबारों ने खबरें बेचने का जो काला धंधा किया उसका भंडाफोड़ कर…

सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला

सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला

अविनाश ने जो बातें कही हैं , उनमें बहुत दम है। और इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि “अश्लीलता कोई राजनीतिक या सामाजिक (या यहां तक कि निजी)…