अविनाश ने जो बातें कही हैं , उनमें बहुत दम है। और इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि “अश्लीलता कोई राजनीतिक या सामाजिक (या यहां तक कि निजी)…
भविष्य की पत्रकारिता का माध्यम क्या होगा? अख़बार, टेलीविजन या फिर इंटरनेट। भारतीय संदर्भ में फिलहाल यह कहा जा सकता है कि अगले 40-50 साल तक तो ये तीनों ही…
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