मुद्दे प्रभात खबर के लिए जरूरत भर होते हैं। ये अखबार बड़ी पार्टियों के एजेंट की तरह काम करता है। कहा जा सकता है कि छोटी और अल्पकालिक पार्टियों की…
August 18, 2009 / 2 Comments / Read Moreहरिवंश जी हमारे समय के उन आख़िरी संपादकों में से हैं, जिनके साथ सामाजिक आंदोलन की पृष्ठभूमि है, विचार का टैग और सफलता के जनपक्षधर मानक हैं। देश के बुद्धिजीवियों…
August 16, 2009 / 9 Comments / Read Moreअगर एक अखबार किसी भी सरकारी नीति के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के प्रति इस हद तक आक्रामक हो जाए कि समाज से इसके विरुद्ध खड़ा होने का आह्वान करने…
August 11, 2009 / 5 Comments / Read Moreजनतंत्र डॉट कॉम पर रांची के एक जागरुक पाठक ने लिखा है कि हिन्दी के बड़े पत्रकार प्रभाष जोशी हाल ही में संपन्न आम चुनाव के दौरान खबरों की खरीद…
August 3, 2009 / 12 Comments / Read More
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