हम यह बता चुके हैं कि एडवांस स्टडी, शिमला में मीडिया में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी पर बहस हुई। उसी बहस में प्रमोद रंजन ने अपना शोधपत्र पढ़ा।…
अभय कुमार दुबे - मैं अपनी बात एक सवाल से शुरू करुंगा। दलित, पिछड़ी और दूसरी पूंजी इस वक़्त कहां है? इस वक़्त पूंजी पर ऊंची जातियों का, ऊंचे तबके…
मीडिया सामाजिक बदलावों का नहीं बल्कि यथास्थिति बनाए रखने का हथियार है। ऐसा हथियार जिसके ज़रिए अगड़ी जातियों के लोग अवर्णों का हक़ मार रहे हैं। यह एक बहुत ही…
कुछ दिन पहले एक पत्रकार साथी ने सरसरी तौर पर एक बात कही। उन्होंने बताया कि “बिहार और झारखंड के मीडिया सर्किल के एक ख़ास तबके के बीच एक चर्चा…
प्रभाष जोशी ने प्रमोद रंजन के जिस लेख का जवाब दिया है वो लेख एक व्यापक नज़रिए से लिखा गया है। इसमें प्रमोद रंजन ने कहीं नहीं कहा है कि…
चलिए प्रभाष जोशी ने जवाब तो दिया वरना हमें तो लगने लगा था कि उम्र की इस दहलीज पर आ कर उन्हें सुनाई और दिखाई कम देने लगा है। तभी…
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