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यह भी सही है, वो न्यास न्यास खेलें, हम परंपरा संभालेंगे

यह भी सही है, वो न्यास न्यास खेलें, हम परंपरा संभालेंगे

दो दिन तक दिल्ली रहा और उससे पहले नैनीताल। चार दिन बाद आज लौटा हूं तो लगा कुछ बाते साफ हो जानी चाहिए। दिल्ली में श्रमजीवी पत्रकारों के लिए केंद्र…

अब बड़ी लकीर खींची जाए

अब बड़ी लकीर खींची जाए

प्रभाष जोशी के बनाए जनसत्ता को आज भी बदले हुए हालत में हम लोग निकाल रहे है। आलोचना करना बहुत आसान होता है और कुछ कर दिखाना बहुत मुश्किल। फिर…

प्रभाष जी के न्यास के बारे में मेरा आखिरी बयान

प्रभाष जी के न्यास के बारे में मेरा आखिरी बयान

अच्छा भैया, न्यास बन गया। भोजन, भजन और भाषण हो गये। न्यास को जो करना था वह करेगा या नहीं करेगा, यह पता नहीं। लेकिन जिस चीज से अपना कोई…

उनसे क्या संकोच जो प्रभाष “वटवृक्ष” के नीचे कांव-कांव कर रहे हैं

उनसे क्या संकोच जो प्रभाष “वटवृक्ष” के नीचे कांव-कांव कर रहे हैं

पत्रकारिता में प्रभाष जोशी की असल परपंरा क्या मानी जाए यह वे निर्धारित करें जिन्होंने लंबे समय तक उनके साथ काम किया है, उन्हें जाना है, समझा है और उनके…

कमर झुकती गयी, ज्यों-ज्यों तनख़ा बढ़ी….!

कमर झुकती गयी, ज्यों-ज्यों तनख़ा बढ़ी….!

कमर झुकती गयी, ज्यों-ज्यों तनखा बढ़ी…. इब जाकर मिल्यो सही तत्त ज्ञान… लाल बुझक्कड़ ने मन ही मन सोच्चा…जे है असली बात… अपने बिचारे परभास जोसी जी चिंता करि-करि के…

पान खाओ, नशा करो… खरीद कर पढ़ना मत

पान खाओ, नशा करो… खरीद कर पढ़ना मत

एक जमाना था कि खद्दर के झोले में लोग धर्मयुग रखकर बड़े गुमान से चलते थे। लोगों को वह पत्रिका कुछ वैसे ही धर्म (यहां धर्म का मतलब कर्तव्य है)…

“एसपी को खरीदने की हैसियत किसी में नहीं थी”

“एसपी को खरीदने की हैसियत किसी में नहीं थी”

दिल्ली के प्रेस क्लब में एसपी सिंह को याद किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार जुटे। कुछ उनके दोस्त। कुछ उनके साथ काम कर चुके पत्रकार जो…