नीलाभ कौन है यह मैं नहीं जानता था। जब राजेंद्र यादव पर बहुत घटिये तरीके से नीलाभ ने लिखा और आरोप लगाया कि अरुंधती को बुला कर हंस के संपादक…
धर्म इस देश में हमेशा से संवेदनशील मसला रहा है। धर्म के नाम पर विभाजन पहले ही हो चुका है। दंगों से धरती बार-बार लाल हुई है। कई धर्म और…
इलाहाबाद से जब से लौटा हूं… एक आशंका गहरा रही है। लगता है कि अब ब्लॉग के रेग्युलेशन की मांग जोर पकड़ेगी। आए दिन ब्लॉगरों पर मुक़दमे होंगे। बेनामियों की…
पत्रकारिता में आने से पहले से प्रभाष जोशी को पढ़ रहा हूं। उनके लिखे ने उनका सम्मान इतना बढ़ाया है कि कई बार दूसरों से बहस में झगड़े की नौबत…
कुछ दिन पहले मेरे छोटे भाई बहन तीस रुपये में मैजिक स्टार्स खरीद कर लाए। चमकते हुए चांद तारे। एक चांद, कई ग्रह और ढेरों तारे। फिर उन्होंने उन चांद…
ये बरसात भी यूं ही निकल जाएगी। इस बरसात भी गांव जाना नहीं हो सकेगा। मन तो काफी चाहता है लेकिन गांव जाने की भूमिका तैयार नहीं हो रही। मतलब…
Recent Comments