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Home » Posts tagged with » Shashi Shekhar

उस हमले ने दुनिया का नक्शा बदल दिया

♦ शशि शेखर, प्रधान संपादक, हिंदुस्तान ♦ 11 सितंबर 2001, उस दिन हरारत थी। सोचा प्राइम टाइम बुलेटिन की योजना तैयार कर जल्दी घर चला चलूं। बाहर निकल रहा था…

हत्यारों से सहानुभूति क्यों?

♦ शशि शेखर, प्रधान संपादक, हिंदुस्तान ♦ मेरे एक पत्रकार मित्र हैं। जन्म और कर्म से सौ फीसदी भारतीय। पैदा हुए तमिलनाडु में और पले-बढ़े मध्य प्रदेश में। पिछले 30…

फिर वही सम्पूर्ण क्रांति!

♦ शशि शेखर ♦ गए बुधवार की सुबह रांची जाना था। टैक्सी ड्राइवर को कहीं से मालूम पड़ गया कि मैं अखबारनवीस हूं। उसने पंजाबी मिश्रित हिंदी में पूछा कि…

संपादक मालिक का सेक्रेटरी नहीं होता-शशि शेखर

संपादक मालिक का सेक्रेटरी नहीं होता-शशि शेखर

पत्रकारिता यदि प्रजातंत्र का चौथा स्तम्भ है, तो पत्रकार उस स्तम्भ की आधारशिला। ऐसे में संपादक को हम चौथे स्तम्भ के सेनापति के रूप में देख सकते हैं। कहने का…

आखिर उरुग्वे से क्यों पीछे रहना चाहते हैं आप?

आखिर उरुग्वे से क्यों पीछे रहना चाहते हैं आप?

आप जानते हैं कि उरुग्वे कहां है? उसकी आबादी कितनी है? किस धर्म और प्रजाति के लोग वहां बसते हैं? कौन सी बोली वहां बोली जाती है? वहां के लोगों…

रंग लाएगी बीमारू प्रदेशों की यह अंगड़ाई

रंग लाएगी बीमारू प्रदेशों की यह अंगड़ाई

हिन्दुस्तान और दुनिया के किसी अन्य देश में सबसे बड़ा अन्तर क्या है? वहां क्रांतियां तीरों और तलवारों की नोक पर चढ़कर आती हैं। खून बहता है, लोग अनाथ होते…

महामहिम को झूठ नहीं बोलना चाहिए

महामहिम को झूठ नहीं बोलना चाहिए

जनाब बराक ओबामा वैसे तो इशारों- इशारों में जार्ज बुश की खिल्ली उड़ाते रहते हैं पर कई मायनों में वे अपने उत्तराधिकार धर्म की रक्षा भी करते हैं। इसमें सबसे…

क्रिकेट को दौलत की कैद में मत डालिए

क्रिकेट को दौलत की कैद में मत डालिए

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 37वें जन्मदिन पर किसी भी क्रिकेटप्रेमी का भावुक हो जाना लाजमी है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने पेशे को नई ऊंचाइयां देते हैं…

ब्लॉग की अनंत दुनिया में हिंदुस्तान की छलांग

ब्लॉग की अनंत दुनिया में हिंदुस्तान की छलांग

ब्लॉग पिछले कुछ वर्षों में अभिव्यक्ति के एक ताक़तवर औजार के तौर पर उभरे हैं। यही वजह है कि गूगल जैसी कंपनियों ने सार्वजनिक क्षेत्र में ब्लॉग सेवा शुरु की…

बेचैन उम्मीदों के सूरज और आशंकाओं के कुहासे

बेचैन उम्मीदों के सूरज और आशंकाओं के कुहासे

हुक्मरां जब दबाव में आते हैं तो उनकी दृष्टि बेहद सीमित और संकुचित हो जाती है। उन्हें दूर का दिखना बंद हो जाता है और कभी-कभी वे ऐसे फैसले लेते…

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